बीमार मवेशियों का नहीं हो रहा समुचित इलाज, नगर निगम प्रशासन नहीं दे रहा अमीरगंज गौशाला में ध्यान, जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर
बालमीक पांडेय @ कटनी. नगर निगम की अमीरगंज स्थित गौशाला की जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक है। भीषण गर्मी के बीच यहां रखे सैकड़ों मवेशी बदहाल व्यवस्था के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। व्यवस्था के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण और निर्देश की ही औपचारिकता निभा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों को गौशाला की व्यवस्था से कोई खास सरोकार नहीं है।
गौशाला में कमरे के अंदर भूसा सिर्फ दिखावे के लिए रखा गया है, जबकि मवेशियों के लिए बने हौद अक्सर खाली रहते हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि श्वान मवेशियों पर हमला करते हैं, इसलिए केवल एक तरफ के हौद में ही भूसा डाला जाता है। यह तर्क खुद ही सवालों के घेरे में है, क्योंकि सैकड़ों मवेशियों के लिए एक तरफ का सीमित हौद कैसे पर्याप्त हो सकता है, भूख से तड़पते मवेशियों की स्थिति देखकर स्पष्ट है कि उन्हें नियमित चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
गौशाला में पर्याप्त शेड नहीं हैं। तेज धूप में दिनभर दर्जनों मवेशी खुले मैदान में खड़े रहने को विवश हैं। अत्यधिक तापमान में यह स्थिति उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कई मवेशियों में प्यास, कमजोरी और लू लगने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। गौशाला का मुख्य उद्देश्य पशुओं को सुरक्षा और संरक्षण देना है, लेकिन यहां की वास्तविकता इसके विपरीत है।
बीमार और घायल मवेशियों का समय पर उपचार नहीं कराया जाता। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सकों की उदासीनता की वजह से कई पशु बिना इलाज के तड़पते रहते हैं। छोटे से लेकर बड़े मवेशी तक बीमारी और भूख से कमजोर हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
गौशाला में गौ-उत्पादों से आय बढ़ाने और मवेशियों की बेहतर देखभाल के कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कोई भी व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आती। गौपालन का कोई स्पष्ट प्रबंधन नहीं है। बच्चे देने वाली गायों से दूध विक्रय की व्यवस्था नहीं है, गोबर से खाद या गौ काष्ठ निर्माण की व्यवस्था नहीं है, गौमूत्र से कीटनाशक निर्माण का कोई प्रयास नहीं है।
नगर निगम द्वारा संचालित गौशाला में इन सभी संभावनाओं की अनदेखी, भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर संकेत करती है। मृत मवेशियों के निष्पादन में बड़ी लापरवाही, कई बार कचरे में फेंकने के वीडियो आए सामने आए। एमएसडब्ल्यू कंपनी को मृत मवेशियों का समय पर निष्पादन करना होता है, लेकिन इसमें भी लापरवाही की जाती है। पूर्व में कई बार मृत मवेशियों को कचरे में ढंककर फेंकने के वीडियो सामने आ चुके हैं। इससे न केवल स्वच्छता नियमों का उल्लंघन होता है बल्कि संवेदनहीनता भी उजागर होती है। नियमित निगरानी न होने की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ रही है। कर्मचारियों की तरफ से मवेशियों की सही देखभाल भी नहीं की जा रही।
अमीरगंज गौशाला की स्थिति जिम्मेदारों की संवेदनहीनता को उजागर करती है। जहां सरकार द्वारा गौसेवा की बात होती है, वहीं हकीकत में मवेशी भूख, प्यास और बीमारी से जूझ रहे हैं। चारे की कमी, उपचार का अभाव और भीषण गर्मी में पर्याप्त शेड तक न होना यह दर्शाता है कि जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। मवेशियों की देखभाल केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीन पर हालात बेहद खराब हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदहीनता के संकेत है, जहां मूक पशु व्यवस्था की अनदेखी का शिकार बन रहे हैं।
बीमार मवेशियों की नियमित देखभाल पशु चिकित्सकों द्वारा कराई जा रही है। रविवार शाम को भी टीम गई थी। भूसे का पर्याप्त स्टॉक है। कर्मचारियों से प्रतिदिन सुबह-शाम के वीडियो भूसा खिलाने के मंगाए जाते हैं। शेड की कमी है, जिसका शीघ्र निर्माण होना है, 17 लाख का प्रस्ताव तैयार कराया गया है।