नगर निगम के विकास दावे फेल, इंदिरा गांधी वार्ड की कॉलोनियों में बदहाल जिंदगी वैध कॉलोनी बनने के चार साल बाद भी सडक़, बिजली-पानी नदारद, 3 हजार से अधिक रहवासी परेशान
कटनी. शहर में नगर निगम द्वारा चहुंमुखी विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक-4 की कई कॉलोनियां इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं। वर्ष 2022 में अवैध से वैध घोषित होने के बावजूद शिवाजी नगर, बालाजी नगर, मोहन नगर और रामनगर में आज भी सडक़, बिजली, पानी और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यहां रहने वाले 3 हजार से अधिक लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
सबसे विकट स्थिति बिजली व्यवस्था की है। रहवासियों के अनुसार, कई किलोमीटर तक बांस-बल्लियों के सहारे अस्थायी बिजली लाइनें खींची गई हैं। तारें कहीं सडक़ पर झूल रही हैं तो कहीं जमीन पर गिरी हुई हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। दशकों से चली आ रही इस समस्या के समाधान के लिए बालाजी नगर व शिवाजी नगर में 178 बिजली पोल और 6 ट्रांसफार्मर लगाने का 92 लाख रुपये का टेंडर भी हुआ था, लेकिन एसओआर बदलने के कारण काम अटक गया। अब यह कार्य कई करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी वैध होने के बाद इस वार्ड से सबसे अधिक विकास शुल्क जमा कराया गया। पहले चरण में 30 लाख रुपये से अधिक और दूसरे चरण के शिविर में 92 लाख रुपये से ज्यादा राशि जमा हुई, इसके बावजूद क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। क्षेत्र की सडक़ें कच्ची और जर्जर हालत में हैं। वाहन चलने पर धूल के गुबार उड़ते हैं, जिससे लोगों को सांस और आंखों की बीमारियां हो रही हैं। नालियों के अभाव में गंदा पानी सडक़ों पर भरा रहता है, जो संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। रहवासियों ने कई बार महापौर प्रीति सूरी, विधायक संदीप जायसवाल और निगम आयुक्त से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
रहवासियों ने बयां की पीड़ा
हमने विकास शुल्क समय पर जमा किया, फिर भी आज तक बिजली और सडक़ नहीं मिली। तारें जमीन पर पड़ी हैं, बच्चों को बाहर भेजने में डर लगता है। निगम सिर्फ वादे करता है, काम नहीं।
चंद्रिका प्रसाद तिवारी, स्थानीय रहवासी।
यहां बारिश में कीचड़ और गर्मी में धूल से जीना मुश्किल हो जाता है। नालियां नहीं हैं, गंदा पानी जमा रहता है। बीमारी फैलने का डर बना रहता है। नगर निगम विकास पर ध्यान नहीं दे रही।
राजेश दुबे, स्थानीय रहवासी।
बिजली के खंभे लगाने का टेंडर हुआ था, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। बांस-बल्लियों पर बिजली जलाना मजबूरी है। कब हादसा हो जाए, कोई भरोसा नहीं। कभी भी क्षेत्र में गंभीर हादसा हो सकता है।
राजकुमार गुप्ता, क्षेत्रीय निवासी।
सडक़ें इतनी खराब हैं कि वाहन चलाने पर गंभीर समस्या होती है। बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। एंबुलेंस तक ठीक से नहीं आ पाती। धूल के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। नालियों से भी समस्या है।
अन्नपूर्णा दुबे, क्षेत्रीय निवासी।
धूल और गंदगी से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं होती। विकास शुल्क जमा करने के बाद भी कॉलोनियों में विकास कार्य न कराया जाना समझ के परे है।
दिव्यांशू सोनी, क्षेत्रीय निवासी।
हम टैक्स और विकास शुल्क देते हैं, फिर भी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वैध कॉलोनी होने के बाद उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थिति और खराब हो गई है। दशकों से यही हाल है। चुनाव के समय नेता सिर्फ वादे करते हैं।
कैलाश पटेल, क्षेत्रीय निवासी।