- कटनी जिले में सवा सौ से ज्यादा किसानों को अनुदान का इंतजार. - किसानों ने कहा पर्यावरण संरक्षण के लिए जरुरी सौर ऊर्जा को कैसे मिलेगा बढ़ावा.
राघवेंद्र चतुर्वेदी @ कटनी. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के दावों के बीच किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि डेढ़ साल से नहीं आई है। अकेले कटनी जिले में ऐसे सवा सौ से ज्यादा किसान हैं, जिन्होंने सोलर पंप लगाने के लिए पंजीयन तो करवाया है, लेकिन केंद्र सरकार से अनुदान राशि नहीं आने के कारण पंप नहीं लगा पा रहे हैं। खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
ग्राम पंचायत सिंदुरसी के किसान पूणेंद्र पटेल बताते हैं कि खेत में सिंचाई के लिए सोलर पंप की इकाई लगवाने के लिए दो साल से इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने पोर्टल पर पंजीयन ही बंद कर दिया है। माना जा सकता है कि पंजीयन खुले तो सोलर पंप लगवाने वालों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है।
बहोरीबंद विकासखंड के ग्राम पंचायत पटना के किसान राजेंद्र चौबे बताते हैं कि 12 एकड़ से ज्यादा में खेती है। पांच साल पहले सोलर इकाई स्थापित की थी। तब 36 हजार रुपए लगा था, शेष राशि सरकार ने अनुदान में दी थी। कुछ दिन पहले भूजल स्तर नीचे जाने के बाद सोलर पंप ने काम करना बंद कर दिया। पंप नीचे उतारने के लिए जरुरी पाइप और सामग्री की कमीं है। सामग्री नहीं मिलने के बाद बिजली सबमर्शिबल पंप का उपयोग करना पड़ा। समय-समय पर विभाग के अधिकारियों को किसानों से मिलना चाहिए और समस्या दूर करने के प्रयास करने चाहिए।
पथराड़ी पिपरिया के किसान व सरपंच गोविंद पटेल बताते हैं कि दो साल पहले सरकारी अनुदान से सोलर पंप लगवाया था, भूजल स्तर कम होने के बाद पानी नीचे गया तो पंप बंद हो गया। अब दूसरे स्थान पर नलकूप खनन के बाद पंप शिफ्ट करेंगे। सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जरुरी है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों से संपर्क कर फायदे बताए जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। सौर ऊर्जा घर की बिजली जरुरतों को पूरा कर सकती है। इसके लिए सरकार द्वारा योजनाएं भी लाई गई है, लेकिन जानकारी के अभाव में ज्यादातर लोग इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
सोलर पंप को लेकर अक्षय ऊर्जा विभाग के एसके तिवारी बताते हैं कि कटनी जिले में सवा सौ किसानों का पंजीयन है। अनुदान राशि आने के बाद इन किसानों के लिए इकाई स्थापित करने काम आगे बढ़ेगा। इस वित्तीय वर्ष में अनुदान आना प्रांरभ हो जाएगा और पंजीकृत किसानों को सोलर पंप का लाभ मिलेगा। पोर्टल पर पंजीयन भी जल्द प्रारंभ होने की संभावना है।
इसलिए जरुरी है सौर ऊर्जा - वातावरण में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण बिजली बनाने के लिए कोयला आधारित ताप विद्युत केंद्र। ऐसे पावर हाउस से निकलने वाले धुंआ के कारण वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड व दूसरी हानिकारक गैसों का स्तर बढ़ रहा है। हालात ऐसे ही रहे तो तापमान ज्यादा बढऩे से वातावरण में बड़े बदलाव होंगे और पूरे मानव जाति को नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके लिए जरुरी है कि वातावरण में प्रदूषण का स्तर कम किया जाए। इस दिशा में सौर ऊर्जा बेहतर ऊर्जा विकल्प साबित हो सकता है।
जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, बढऩे के बजाए घट रही लाभान्वितों की संख्या
- 446 लोगों ने पहले चरण में लगवाए थे सोलर पंप.
- 150 लोगों ने दूसरे चरण में स्थापित करवाई थी इकाई.
- 16 कार्यालय पीएचई विभाग के हैं जहां लगी है सोलर इकाई.
- 5 कार्यालय वन विभाग के हैं, जहां सोलर इकाई स्थापित है।
सोलर पंप पर 60 प्रतिशत तक अनुदान, किसान को देनी होती है इतनी राशि
- 47 हजार 213 रुपए एक एचपी डीसी सबमर्मिबल
- 55 हजार 819 रुपए दो एचपी डीसी सरफेस पर.
- 76 हजार 312 रुपए 3 एचपी डीसी सबमर्सिबल पर.
- 1 लाख 4 हजार 577 रुपए 5 एचपी डीसी सबमर्सिबल पर.
(नोट- सोलर पंप के लिए सरकार ने अलग-अलग क्षमता पर कुल बजट अनुसार अनुदान राशि तय की है.)