Negligence in women safety
सेफ सिटी योजना…। इस योजना में महिला सुरक्षा के नाम पर की जा रही बेपरवाही प्रशासन और पुलिस की नाकामी को दर्शाती है। जब तक सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं होते, बेटियों और महिलाओं को असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा। अब जरूरत है कि सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं ताकि महिलाएं बिना डर के बाहर निकल सके और अपराधियों के हौंसले पस्त हो सकें…।
कटनी. शहर में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर तीन साल पहले बनाई गई ‘सेफ सिटी योजना’ अब तक अधूरी पड़ी है। 2023 में चिन्हित किए गए 14 डेंजर व क्राइम जोन में न तो पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था की गई है और ना ही छेड़छाड़ करने वालों पर निगरानी रखने के लिए हिडन कैमरे लगाए गए। नगर निगम, पुलिस प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से इन इलाकों को महफूज बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
शहर के कटनी, मुड़वारा और साउथ स्टेशन सहित कई स्थान असुरक्षित हैं, लेकिन आज भी इन इलाकों में स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट और सीसीटीवी कैमरों की समुचित व्यवस्था नहीं है। नगर निगम द्वारा कुछ जगहों पर लाइटें लगाकर महज औपचारिकता निभा दी गई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रात के समय अंधेरे वाले इलाकों में पर्याप्त रोशनी की जरूरत थी, जो अब भी नहीं है। अपराधियों पर नजर रखने के लिए हिडन कैमरे लगाने थे, लेकिन यह योजना अब भी अधूरी है। इन इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी की योजना थी, लेकिन इसका क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ।
बजट बना रोड़ा
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा महानगरों इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर आदि तर्ज पर कटनी में भी योजना में काम होना था। इसके लिए 25-25 लाख रुपए अन्य शहरों को तो मिले, लेकिन कटनी आज भी महरूम है। इस राशि से लाइटिंग और अच्छी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरों का इंतजाम होना था, जो आजतक नहीं हुआ। इसके अलावा 24 घंटे पुलिस मोबाइल द्वारा गश्त करनी थी। यह मोबाइल वाहन को शहर के सभी थानों से जोड़ा जाना था। जागरुकता गतिविधियां चलाई जानी थीं। यह पूरी पहल अपराधियों में भय पैदा करने व महिलाओं, बेटियों को सुरक्षित करने के लिए किया जाना था।
निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत
शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने, सभी चिन्हित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और लाइटिंग सिस्टम को दुरुस्त करने से ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सवाल यह उठता है कि सेफ सिटी योजना की शुरुआत के तीन साल बाद भी सुरक्षा अधूरी क्यों है, अपराध रोकने के लिए कैमरे और लाइटिंग की व्यवस्था कब पूरी होगी?, महिला सुरक्षा के दावों को कब हकीकत में बदला जाएगा?
इन स्थानों पर लगने से कैमरे व लाइट
जानकारी के अनुसार शहर के पीरबाबा, झिंझरी जिला जेल के पास, माधवनगर, मिशन चौक, बस स्टैंड, पन्ना मोड़, सतना मोड़, खिरहनी फाटक के समीप, एसीसी रोड, नई बस्ती, सब्जी मंडी, मुड़वारा रेलवे स्टेशन, मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक का हिस्सा व रेलवे कॉलोनी, गाटरघाट, इमलिया रोड को डेंजर व क्राइम जोन में शामिल किया गया था। यहां पर अबतक कोई खास पहल नहीं हुई।
वर्जन
सेफ सिटी योजना स्वागत योग्य विषय है। यह शायद मेरी पदस्थापना के पहले की योजना है। महिलाओं, बालिकाओं व बच्चों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। इस योजना में क्या कमी रह गई है इसको दिखवाया जाएगा। शीघ्र ही विभागीय समन्वय स्थापित कर योजना पर काम कराएंगे व आवश्यक पत्राचार किया जाएगा।
अभिजीत कुमार रंजन, एसपी।
वर्जन
बालिकाओं की सुरक्षा के लिए यह बहुत ही बेहतर पहल है। पूर्व में इन स्थानों में लाइटिंग कराया जाना बताया गया है। चयनित स्थलों में विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक पहल की जाएगी। संबंधित नोडल अधिकारी से इस संबंध में चर्चा कर कार्ययोजना को तैयार कराया जाएगा।
नीलेश दुबे, आयुक्त नगर निगम।
वर्जन
2023 में सेफ सिटी योजना लागू की गई है। इसमें महिला बाल विकास विभाग, नगर निगम व पुलिस विभाग को मिलकर चिन्हित हॉटस्पॉट में बेहतर गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे व लाइटिंग कराई जानी थी। 25 लाख रुपए बजट का प्रस्ताव गया है, अभी स्वीकृति नहीं मिली है। इन स्थलों में गश्त कराई जानी है।
नयन सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग।