विजयराघवगढ़ और रीठी बने गिद्धों के सुरक्षित बसेरे, संरक्षण प्रयासों के दिखने लगे सकारात्मक परिणाम, आज होगी अंतिम गिनती. जिले के विजयराघवगढ़ और रीठी वन क्षेत्र में गिद्धों की सबसे अधिक मौजूदगी दर्ज की गई है
कटनी. जिले में प्रकृति के सफाई मिद्ध कहे जाने वाले गिद्धों की तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गणना चल रही है। वन विभाग द्वारा 22, 23 और 24 मई तक चलने वाली इस गणना के दूसरे दिन शनिवार को जिले में कुल 242 गिद्ध रिकॉर्ड किए गए। सुबह 5 बजे से 8 बजे तक वन विभाग की टीमों द्वारा एप और प्रपत्र के माध्यम से गणना की गई। पर्यावरण विशेषज्ञ मोहन नागवानी ने बताया कि प्रदेशभर में करीब 9 हजार टीमें इस अभियान में जुटी हैं।
जिले के विजयराघवगढ़ और रीठी वन क्षेत्र में गिद्धों की सबसे अधिक मौजूदगी दर्ज की गई है। गणना में सर्वाधिक संख्या इंडियन लॉन्ग बिल्ड वल्चर प्रजाति की पाई गई, वहीं कुछ सफेद गिद्ध भी नजर आए। वन अधिकारियों के अनुसार यह ग्रीष्मकालीन गणना है, जिसमें स्थायी रूप से रहने वाले गिद्धों की संख्या दर्ज की जाती है, जबकि शीतकालीन गणना में प्रवासी गिद्ध भी दिखाई देते हैं।
इससे पहले फरवरी माह में हुई गिद्ध गणना में विजयराघवगढ़ एवं रीठी वन परिक्षेत्र में कुल 282 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इनमें 225 वयस्क और 57 अवयस्क गिद्ध शामिल थे। साथ ही 135 घोंसले चिन्हित किए गए थे, जिनमें 132 सक्रिय और 3 निष्क्रिय पाए गए। वन विभाग के अनुसार फरवरी की गणना में 236 घमर (व्हाइट रम्प्ड) गिद्ध, 21 लॉन्ग बिल्ड गिद्ध, 12 सफेद गिद्ध, 6 देसी गिद्ध लॉन्ग बिल्ड और 2 राज गिद्ध पाए गए थे। विजयराघवगढ़ क्षेत्र में 111 और रीठी क्षेत्र में 24 घोंसले दर्ज किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी गिद्ध प्रजातियों की बढ़ती संख्या वन क्षेत्र में बेहतर संरक्षण और सुरक्षित वातावरण का संकेत है।