कौशाम्बी

#UpTravelGuide सांप्रदायिक सद्भाव की त्रिवेणी है कड़ाधाम, हिन्दू मुस्लिम एकता का भी है प्रतीक

शक्तिपीठ शीतलाधाम, कड़कशाह बाबा की मजार, सूफी संत मलूक दास का जन्म स्थान व जय चंद्र का यही है किला

3 min read
शक्तिपीठ शीतलाधाम, कड़कशाह बाबा की मजार, सूफी संत मलूक दास का जन्म स्थान व जय चंद्र का यही है किला

कौशांबी. गंगा तट पर बसा कडाधाम को सांप्रदायिक सद्भाव की त्रिवेणी कहा जाता है| यहाँ पर एक ओर इक्यावन शक्तिपीठों मे से एक माँ शीतला माता का मंदिर है तो दूसरी ओर ख्वाजा कड़कशाह बाबा की मजार| इसी कडाधाम मे सूफी संत मलूक दास की जामन स्थली भी है| गंगा किनारे राजा जयचंद्र का खंडहर किला भी इसी कडाधाम की भूमि पर है| पर्यटन की अपार संभावनावों वाले इस कडा धाम के विकास की योजनाए तो बनती है लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित कर रह जाती है| कड़ाधाम के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का विकास सरकार की ओर से केएम श्रद्धालुओं की ओ से अधिक कराया जाता है|

यही गिरा था सती का दाहिना कर

इक्यावन शक्ति पीठों में से एक सिद्ध पीठ माँ शीतला का मंदिर कौशाम्बी जिले के कड़ाधाम में स्थित है| गंगा नदी किनारे बने इस मंदिर में माँ शीतला के दर्शन के लिए देश के कोने कोने से भक्त गण आते है| इस स्थान पर देवी सती का दाहिना कर (पंजा) गिरा था| जो आज भी देवी शीतला की मूर्ति के सामने कुंड में दिखता है| इस कुंड की विशेषता यह है कि इससे हर समय जल की धारा निकलती रहती है| इस कुंड को जल या दूध से भरवाने के लिए भक्त गण अपनी बारी का इंतजार करते है| कुंड को जल या दूध से भरवाने पर भक्तों की सभी मनौती पूरी होती है ऐसा लोगों का मानना है| मा शीतला को पूर्वान्चल की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। मां शीतला के र्दशन व्रत रखने से माताओं को पुत्र की प्राप्ति होती हैं। नवरात्री में माँ के दर्शन के लिए दिन भर मेले स नजारा मंदिर में दिखता है| यह है सिद्ध पीठ माँ शीतला का मंदिर| यही पर देवी सती का दाहिना कर (पंजा) गिरा था| पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष ने यज्ञ किया और अपनी बेटी सती व उनके पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया| इसे अपमान समझ देवी सती यज्ञ स्थल पहुंची और हवन कुंड में कूद कर जान दे दिया| जब इस बात की जानकारी भागन शंकर को हुई तब वह सती के शरीर को लेकर पागलों की तरह विचरण करने लगे | इस पर विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र से सती के अंगो को कटना शुरू किया| जहाँ जहाँ सती का अंग गिरा वह स्थान सिद्ध पीठ बना| शीतला धाम मंदिर में कुंड के अन्दर आज भी देवी सती का कर बना हुआ है|

कड़कशाह बाबा के मजार पर पूरी होती है मन्नत
कड़ाधाम मे ही बाबा कड़कशाह बाबा की मजार है| बताया जाता है की खवाजा कडक शाह बाबा के पूर्वज ईरान देश से यहाँ आए थे| उसी के बाद से बाबा कडक शाह यहाँ अपने अनुयायियों के लिए उनका भला कराते है| बाबा की ख्याति देश भर मे फैली हुई है| बाबा के मानने वालों मे न सिर्फ मुस्लिम धर्म के लोग बल्कि हिन्दू धर्म के लोग भी शामिल है|


खंडहर हो गया जयचंद्र का किला

गंगा तट पर राजा जलचन्द्र के किला का आज भी अवशेष मौजूद है| इस किले के देखरेख करने की ज़िम्मेदारी पुरातत्व व पर्यटन विभाग की है लेकिन सिर्फ संरक्षित स्मारक का बोर्ड लगाकर इसे लावारिस हालत मे छोड़ दिया गया है| हालत यह है की गंगा की बाढ़ मे यह ऐतिहासिक किला हर साल जमीदोज़ होता जा रहा है| स्थानीय लोगों ने किले के काफी अधिक भूभाग पर कब्जा कर उस पर खेती करना शुरू कर दिया है| बारिश के दिनों मे किला के खंडहर से तमत तरह की कीमतों धातुए भी निकलती है जिनहे स्थानीय लोग उठा ले जाये हैं|

मलूक दास को भूल रहा प्रशासन

कडा मे ही सूफी संत मलूक उपदेश देते थे| कडा मे ही सूफी संत मलुकदास का जन्म व कर्म स्थान है| जिस महान संत मलूक दास ने लोगों को आपसी भाई चारा का संदेश दिया आज उनका जन्म स्थान प्रशासनिक व राजनैतिक लोग भूल गए हैं| मलूक दास के अनुयायियों ने अपने दम पर उनके जन्मस्थान व मजार का जीर्णोद्धार कराया है| कहने भर को पर्यटन विभाग स्थानीय प्रशासन की मदद से मलूक दास के जन्म स्थान को संरक्षित करने का दावा करता है लेकिन यह सही नहीं है|

यादों तक ही न सिमट जाये कडा का इतिहास

ऐतिहासिक व धार्मिक लिहाज से कडा धाम का अपना एक अलग ही महत्व है| इस स्थान को धार्मिक सद्भाव की त्रिवेणी कहा जाता है| गंगा तट पर माँ शीतला माता का मंदिर है तो थोड़ी दूर पर ख्वाजा कडक शाह बाबा की मजार स्थापित है| कडा मे ही संत मलूक दास की जन्म स्थली है| राजा जयचंद्र का किला भी यहीं है| इसी कारण यहाँ पूरे साल श्रद्धालुओं व पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है| इतना सब होने के बाद भी यह धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल पर्यटन विभाग के साथ साथ स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों द्वारा भुलाया जा रहा है| "कडा धाम मे पर्यटन व विकास की अपर संभावनाए हैं| इस धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल के विकास के लिए योजनाए तैयार कर शासन को भेजा गया है| जल्द ही यहाँ पर विकास कराया जाएगा| पर्यटन विभाग भी अलग से कड़धाम के विकास का खाका तैयार कर रहा है|

Updated on:
22 Sept 2019 02:48 pm
Published on:
21 Sept 2019 09:21 pm
Also Read
View All