
CG News: कवर्धा जिला मुख्यालय में बाइक स्टंटबाजी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर की मुख्य सड़कों पर युवा तेज रफ़्तार में बाइक दौड़ाते हुए खुलेआम खतरनाक स्टंट दिखाते नजर आ रहे हैं। यह सिर्फ मौज-मस्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी जान पर बन सकता है। बिना हेलमेट और सुरक्षा साधनों के इस तरह की हरकत किसी भी लिहाज से सही नहीं कही जा सकती।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह स्टंटबाजी शहर के आउटर क्षेत्रों में नहीं बल्कि कलेक्टर और एसपी कार्यालय के बीच स्थित मुख्य मार्ग पर हो रही है। वहीं स्टंट करने वाले युवक खुद ही इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल रहे हैं। देर रात शहर की सड़कों पर यह मनमानी जारी है लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती।
इससे पहले भी शहर के मुख्य मार्गों पर आतिशबाजी के खतरनाक दृश्य देखने को मिले थे। हाथ में रॉकेट और बम रखकर पत्थर की तरह फेंकना, डबल शॉट फटाखों को बंदूक की तरह चलाना, सब देख चुके हैं। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई लेकिन कई युवक रसूखदार परिवारों से होने के कारण कठोर कार्रवाई नहीं हो पाई।
अब भी वही स्थिति है मुख्य मार्ग पर स्टंट कर रहे हैं न जाने कब दुर्घटना हो जाए। बावजूद इस पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है। माता-पिता भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। कई पालक अपने नाबालिग बच्चों को महंगी स्पोर्ट्स बाइक दे रहे हैं, जितने में एक मिडिल क्लास परिवार कार खरीद ले, उतने में अमीर माता-पिता बाइक दिला देते हैं। ऐसे में 15-16 साल से लेकर 19-25 वर्ष तक के युवक-किशोर तेज रतार को स्टाइल मानकर सड़क पर जान जोखिम में डाल रहे हैं।
दीपावली के दौरान भी कई नाबालिग और युवाओं ने मंदिर परिसर में पटाके फोड़कर, भद्दी गालियां देते हुए और लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए उत्पात मचाया था। जब उनके चेहरे सामने आए तो लोगों के होश उड़ गए। ये वही बच्चे थे जिनके घरों को समाज सफेदपोश, व्यापारी, नेता, अधिकारी, करोड़पति परिवार कहता है।
इसके बाद कुछ युवक तो कलेक्टर गेट के सामने तक बैठकर खतरनाक तरीके से फटाके रहे, जिससे कई राहगीर बाल-बाल बचे। पुलिस ने वीडियो के आधार पर पहचान तो की, पर दबाव के चलते केवल कामचलाऊ कार्रवाई हुई। यह खुद शहर में चर्चा का विषय बना।