छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल हमेशा ही विवादों के घेरे में रहते हैं।
कवर्धा. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल हमेशा ही विवादों के घेरे में रहते हैं। इस बार भेद- भाव का एक विवाद सामने आया है। सीनियर डॉक्टर के बजाए जूनियर डॉक्टरों को सरकारी आवास आबंटित कर दिया गया हैं।इससे सीनियर डॉक्टर मानसिक रूप से काफी परेशान है। इसकी शिकायत CMHO से भी की है। साथ ही यह भी कहा है कि वे इस मामले में न्यायलय भी जा सकते है।
तीन माह पूर्व फरवरी में डॉ. बाचकर और मई में डॉ. मिश्रा का आवास खाली हुआ था। इस पर जिला अस्पताल के दो डॉक्टर पीसी प्रभाकर और स्वदेश जायसवाल ने आवास की मांग रखी। इसमें डॉ. जायसवाल को आवास आबंटित कर दिया गया। डॉ. पीसी प्रभाकर जिला अस्पताल में वर्ष 2006 से नियुक्त हैं, जबकि डॉ. जायसवाल वर्ष 2016 में नियुक्त हुए। इसके बाद भी डॉ. प्रभाकर को आवास नहीं दिया गया।
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डॉ. प्रभाकर ने सीएमएचओ डॉ. अखिलेश त्रिपाठी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर, जानबूझकर सुनियोजित तरीके से उनके आवेदन को लंबित रखा। आवास खाली होने के मात्र चार दिवस के भीतर पूर्व नियोजित योजनानुरूप कुटरचित भेदभाव पूर्ण नियम विरूद्ध आवास आबंटन प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
डॉ. प्रभाकर, भेदभाव होने के कारण काफी परेशान है। उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि शासन द्वारा प्राप्त सुविधाओं से उपेक्षित करते हुए पक्षपात पूर्ण आवास आबंटन करने के कारण उन्हें भारी मानसिक व अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की, नियमानुसार वरिष्ठता आधार पर आवास गृह आबंटित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं तो सीएमएचओ के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।