खंडवा

वर्ष 2025 : प्रेरक ये चार कहानियां…झोपड़ी से निकलकर विदेश में पढ़ाई, खेतों से उद्यमिता, दीवारों से शिक्षा का नवाचार

संघर्ष से सफलता तक : खंडवा की प्रेरक कहानियां वर्ष 2025 ने खंडवा को नई पहचान दी, ये चार कहानियां..जो शिक्षा, नवाचार और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार करने की राह खोली

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Jan 01, 2026
संकल्प, शिक्षा व नवाचार की उड़ान... झोपड़ी से निकलकर विदेश में पढ़ाई, खेतों से उद्यमिता, दीवार से शिक्षा का नवाचार

संघर्ष से सफलता तक : खंडवा की प्रेरक कहानियां वर्ष 2025 ने खंडवा को नई पहचान दी, ये चार कहानियां..जो शिक्षा, नवाचार और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार करने की राह खोली

युवाओं नेवर्ष 2026 में भी कई नवाचार का ब्लू प्रिंट तैयार किया है।

वर्ष 2025 में चार युवाओं ने अद्भुत कहानियां रचीं। जो यादगार रहेंगी। आदिवासी किसान के बेटे आशाराम पालवी ने झोपड़ी से निकलकर विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा किया, शिक्षक नीतू ठाकुर ने स्कूल की दीवारों को अनुशासन और शिक्षा का माध्यम बनाया। नगर निगम के लाइब्रेरियन सपन जैन ने दोहरी सफलता से प्रशासनिक सेवा में कदम रखा और युवा किसान राहुल तोमर ने अदरक की खेती से आधुनिक उद्यमिता की राह खोली। ये कहानियां बताती हैं कि शिक्षा, नवाचार और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार हो सकता है। यही नहीं ये युवा वर्ष 2026 में भी कई नवाचार का ब्लू प्रिंट तैयार किया है।

अनुशासन के बीच बच्चों को पढ़ा रहीं दीवारें

शासकीय प्राथमिक शाला झुमरखाली में शिक्षक का वर्ष 2025 का नवाचार स्कूलों की दीवारें बच्चों को पढ़ा रही हैं। स्कूल में नवाचार के साथ ही अनुशासन की पाठशाला बनाया। इसके लिए शिक्षक नीतू ठाकुर पुरस्कृत हो चुकी हैं। मिट्टी, लकड़ी, कपड़ा, बीज और पत्तों जैसी स्वदेशी सामग्री से टीएलएम तैयार कर गणित और भाषा शिक्षण को खेल-खेल में आनंददायी बनाया। चालू वर्ष में शैक्षिक स्तर में सुधार हुआ। अभिभावक भी बच्चों की उपलब्धि की सराहना कर रहे हैं।

वर्ष 2026 में नवाचार :

शिक्षिका नीतू ठाकुर ‘ मेरा गांव, मेरा स्वदेश ’ अभियान के तहत स्थानीय भाषा, लोककथाएं, पारंपरिक खेल और जनजातीय कहानियों को कक्षा गतिविधियों में शामिल करेंगे।

संकल्प : बच्चों में आत्मनिर्भरता, श्रम सम्मान और स्वदेशी सोच विकसित करना ताकि वे अपने परिवेश और जड़ों पर गर्व कर सकें। प्रत्येक सप्ताह ‘ स्वदेशी दिन ’ मनाकर बच्चे पारंपरिक भोजन, खिलौने और हस्तशिल्प से जुड़े अनुभव साझा करेंगे।

आदिवासी गरीब किसान के बेटे ने रचा इतिहास

आदिवासी किसान हीरालाल पालवी के बेटे आशाराम पालवी ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया है। झोपड़ी से निकलकर विदेश तक पहुंचने की उनकी कहानी वर्ष 2025 को यादगार बन गई। आशाराम केंद्रीय विश्वविद्यालय कर्नाटक से भूगोल में स्नातक की पढ़ाई की। अब लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर, इंग्लैंड में एमएससी इन जियोस्पैशियल डेटा एनालिसिस की पढ़ाई कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने उनके हौंसले को देखते हुए 35 लाख रुपए की स्कॉलरशिप प्रदान की।

संकल्प

आशाराम कहते हैं कि अध्ययन कर अपने क्षेत्र और देश के विकास में योगदान देंगे। वे चाहते हैं कि ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिले।

भविष्य की योजना

पालवी ने पत्रिका को बताया कि एक साल का कोर्स है। दो साल तक विदेश में रहेंगे। इसके बाद भारत लौटकर भू-गर्भीय शोध और तकनीकी विकास में काम करना चाहते हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

युवाओं के लिए संदेश

आशाराम का कहना है कि कठिन परिस्थितियां कभी रुकावट नहीं होतीं। मेहनत, लगन और शिक्षा से हर सपना साकार किया जा सकता है।

निगम लाइब्रेरियन सपन जैन की दोहरी सफलता

वर्ष 2025 में नगर निगम के लाइब्रेरियन सपन जैन के लिए ऐतिहासिक रहा। सागर जिले के पटना बुजुर्ग निवासी सपन ने एक साथ दो परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर अपनी मेहनत और धैर्य का प्रमाण दिया। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य सेवा परीक्षा 2023 में चौथे प्रयास में सहकारिता विस्तार अधिकारी पद पर चयन हुआ, वहीं 2024 की परीक्षा में 5वें प्रयास में सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण पद हासिल की। यह उपलब्धि उनके संघर्ष, निरंतर प्रयास और भाई शरद जैन के सहयोग का परिणाम है।

संकल्प

सपन का लक्ष्य वर्ष 2026 में और ऊंचाइयां छूना है, ताकि समाज और प्रशासनिक सेवा में योगदान दे सकें। उनका कहना है कि अभी वह डिप्टी कलेक्टर के लिए प्रयास करेंगे।

युवाओं को संदेश

सपन युवाओं के लिए संदेश देना चाहते हैं कि असफलता से घबराएं नहीं। प्रयास, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। हर प्रयास सीखने का अवसर है। और दृढ़ संकल्प से ही सपनों को साकार किया जा सकता है।

अदरक की खेती से युवा किसान की नई पहचान

चिचली खुर्द के युवा राहुल तोमर ने बीकॉम की पढ़ाई के बाद पिता की परंपरागत खेती को आधुनिक दिशा दी। उन्होंने पांच एकड़ भूमि में अदरक की बोवनी कर उद्यमी खेती की शुरुआत की। राहुल बताते हैं कि प्रति एकड़ लगभग 60 क्विंटल अदरक का उत्पादन होगा। बाजार में थोक में 36 रुपए प्रति किलो भाव है। इससे नौ लाख रुपए की आय की संभावना है। यह पहल उन्होंने अपने मित्र से सीखी । खेती को लाभ का धंधा बनाने का संकल्प लिया।

संकल्प

राहुल का उद्देश्य पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए परंपरागत खेती को उद्यानिकी फसलों से जोडऩा है। वर्तमान में वे एक फसल के साथ दो फसलों का उत्पादन ले रहे हैं और भविष्य में दो से तीन फसलों का संयुक्त उत्पादन करने की तैयारी कर रहे हैं।

युवाओं के लिए संदेश

राहुल का मानना है कि शिक्षा और नवाचार से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। वे युवाओं को संदेश देते हैं कि परंपरा से जुड़कर आधुनिक तकनीक अपनाएं और खेती को रोजगार का मजबूत साधन बनाएं।

Published on:
01 Jan 2026 12:03 pm
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