खंडवा

अवनि की नई सुबह… मां ने नौकरी छोड़ थामा हाथ…खुशियों की लहर खंडवा से मुंबई तक दौड़ गई

एक मासूम मुस्कान पूरे परिवार की दुनिया बदल देती है। बुधवार को ऐसा ही एक भावनात्मक पल खंडवा के किलकारी शिशु गृह में देखने को मिला। जब मुंबई के दत्तक माता-पिता ने चार माह की अवनि का हाथ थामा।
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Updated: 4 Sep 2025, 12:06 PM IST
Central Adoption Resource Authority(CARA)
दत्तक ग्रहण समारोह : ढोल-नगाड़ों के बीच किलकारी शिशु गृह में दत्तम माता की गोद भराई की रस्म पूरी

दत्तक ग्रहण समारोह : गणेशोत्सव पर मुंबई के परिवार को चार साल बाद मिली खुशियां...ढोल-नगाड़ों के बीच किलकारी शिशु गृह में दत्तम माता की गोद भराई की रस्म पूरी..अवनि को नया परिवार मिला। जैसे ही अवनि माता-पिता के गोद में पहुंची कि खुशियों की लहर खंडवा से मुंबई तक दौड़ गई।


खुशियों की लहर खंडवा से मुंबई तक दौड़ गई

एक मासूम मुस्कान पूरे परिवार की दुनिया बदल देती है। बुधवार को ऐसा ही एक भावनात्मक पल खंडवा के किलकारी शिशु गृह में देखने को मिला। जब मुंबई के दत्तक माता-पिता ने चार माह की अवनि का हाथ थामा। गणेशोत्सव के अवसर पर सहज समागम फाउंडेशन द्वारा आयोजित दत्तक ग्रहण समारोह में ढोल-नगाड़े के बीच अवनि को नया परिवार मिला। जैसे ही अवनि माता-पिता के गोद में पहुंची कि खुशियों की लहर खंडवा से मुंबई तक दौड़ गई।

रीति-रिवाजों के साथ गोद भराई की रस्म

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) मुंबई में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया। चार साल इंतजार के बाद दंपती का सपना साकार हुआ। जैसे ही अवनि को उनके हाथों में सौंपा गया, माता-पिता खुशी से झूम उठे। इससे पहले रीति-रिवाजों के साथ गोद भराई की रस्म ढोल-नगाड़ों, सूखे मेवों और बाजे-गाजे के बीच सपन्न हुई। कार्यक्रम में बतौर मुय अतिथि एसडीएम बजरंग बहादुर सिंह और विशेष अतिथि डॉ. प्रतापराव कदम के हाथों अवनि को माता-पिता को सुपुर्द किया। साथ ही दत्तक ग्रहण की केंद्रीय शर्तों के तहत कागजी प्रक्रिया भी की गई।

अवनि समेत 22 को मिला परिवार

संस्था की संचालक दीपमाला विधानी बताती हैं कि इस संस्था की बेटा, बेटियां दिल्ली, मुंबई, मध्य प्रदेश, राजस्थान, यूपी से लेकर अमेरिका तक परिवारों को खुशियां और भावी पीढ़ी की बारिश बनी हैं।

मां के साथ मिला नाना-नानी का प्यार

अवनि को न सिर्फ परिवार मिला बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त है। दत्तक पिता एचसीएल में अधिकारी हैं, जबकि दादा और नाना बैंकिंग क्षेत्र में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। अवनि को माता-पिता के साथ ही नाना-नानी मिले। सभी खासे उत्साहित थे। मां ने बताया कि अवनि की देखरेख के लिए नौकरी छोड़ दिया।

जन्म के चार दिन बाद ही छोड़ा

अवनि को उसके माता-पिता ने जन्म के चार दिन बाद ही यह कहकर छोड़ दिया था कि वह उसका पालन-पोषण करने में असक्षम है। माता-पिता ने स्वयं आगे रहकर उसे बाल कल्याण समिति को सुपुर्द किया था। इसके बाद किलकारी शिशु गृह में ही उसकी देखरेख की जा रही थी।

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4 Sep 2025, 12:06 PM IST
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