
- जंगल को काटकर बनाया जा रहा खेत, बीट क्रमांक 13 और 14 में जंगल साफ
- ग्रामीण बोले - अब मवेशियों के लिए भी जंगल के रास्ते बंद
- वर्ष 2016 में हुई थी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, उसके बाद किसी ने नहीं दिया ध्यान
30 से 40 एकड़ में खेत बनाए
वन भूमि पर अतिक्रमण कारियों द्वारा खेती की जा रही है। 30 से 40 एकड़ के खेत बना लिए हैं। इस मौसम में अतिक्रमण कारियों ने मक्का, कपास और सोयाबीन की फसल लगा रखी है। बताया जाता है कि 2018 के बाद जंगल में अतिक्रमण बढ़ गया, अब यह िस्थति हो गई है जंगल सपाट मैदान बन गया है और खेती की जाने लगी है।
ग्रामीणों में आक्रोश, कहा पशुओं को भी नहीं चरने दे रहे
जंगल में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जंगल पर एक तरह से अतिक्रमण कारियों ने कब्जा कर लिया है। हर जगह बागड़ बना दी है, जिससे मवेशी जंगल में भी नहीं जा पा रहे हैं। किसी ओर रास्ते से मवेशी जंगल में ले जाते हैं तो उन्हें भगा दिया जाता है।
वन विभाग की अब तक नहीं जागा
वन भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए वन विकास निगम की नींद अब तक नहीं टूटी है। वर्ष 2016 में हुई थी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने पलट के इस ओर नहीं देखा। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़े हुए हैं। बड़वानी, झाबूआ, अलीराजपुर और खरगोन जिलों से आकर लोगों ने यहां कब्जा कर लिया है, लेकिन निगम अब तक इन पर कार्रवाई को लेकर हिम्मत नहीं जुटा पाया हैं।
अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई
बामझर वन समिति अध्यक्ष अजीम खान का कहना है कि बामझर का घना जंगल हुआ करता था। शुरूआत में करीब 10 लोगों ने अतिक्रमण किया। इसके पर विभाग ने ध्यान नहीं दिया। अब यहां 100 से अधिक परिवार बस गए हैं जिन्होंने पेड़ों को काटकर जंगल में खेत बना लिए हैं। इस संबंध में वन विकास निगम के अधिकारियों को भी जानकारी दी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में भी उठा मामला
ग्राम पंचायत बामझर की ग्राम सभा में जंगल में हो रहे अतिक्रमण का मामला उठा था। वन क्षेत्र क्रमांक 13, 14 वन भूमि में बाहरी व्यक्तियों का अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रस्ताव भी पारित हुआ था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
- ग्राम बामझर वन क्षेत्र क्रमांक 13, 14 में अतिक्रमण के जानकारी मिली है। इस संबंध में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से चर्चा कर कार्रवाई की जाएगी। - रामकुमार अवधिया, डीएफओ वन विकास निगम।