खंडवा

AI प्लेटफार्म के संस्थापक डॉ प्रत्युष बोले…भारत एक ऐसा राष्ट्र जो अद्वैत परंपरा में AI को लेकर सकारात्मक सोच रखता है

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित पंच दिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस विषय पर देश के प्रमुख चर्चित एआई प्लेटफार्म के संस्थापक डॉ प्रत्युष कुमार आईआईटी नई दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग, रामकृष्ण मिशन चेन्नई के स्वामी परम शिवानंद कल्याण मुत्तुराजन ने अपने विचार व्यक्त किए।

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Apr 20, 2026
ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस विषय पर अपने विचार रखते विद्वान

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित पंच दिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस विषय पर देश के प्रमुख चर्चित एआई प्लेटफार्म के संस्थापक डॉ प्रत्युष कुमार आईआईटी नई दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग, रामकृष्ण मिशन चेन्नई के स्वामी परम शिवानंद कल्याण मुत्तुराजन ने अपने विचार व्यक्त किए।

भारत में 15 वर्षों में कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में व्यापक

अद्वैत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘ एआई ’ पर चर्चा करते हुए सर्वमएआई के संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो अपनी अद्वैत आधारित गहन दार्शनिक परंपरा के कारण एआई को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर एआई को लेकर भय का वातावरण है। तकनीक से जुड़े लोग नौकरियों के संभावित नुकसान और इस क्षेत्र में आने वाले बड़े बदलावों को लेकर चिंतित हैं, जबकि भारत अपेक्षाकृत आशावादी दृष्टिकोण अपनाता है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। एआई को उन्होंने एक यूनिफाइड सिस्टम बताया, जो जटिल कार्यों को करने, पहचानने और परिवर्तन लाने में सक्षम है।

अद्वैत वेदान्त के दर्शन से मानव जीवन अधिक सुगम

वर्तमान समय में हम पुनः डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर अग्रसर हो रहे हैं और एआई के माध्यम से उसे अधिक अर्थपूर्ण और उपयोगी बना रहे हैं। उनके अनुसार, तकनीक का स्तर निरंतर बढ़ेगा, किंतु वर्तमान समय में हमारे पास यह अवसर है कि हम एआई को किसी भी दार्शनिक दृष्टिकोण के साथ संरेखित कर सकते हैं, जिससे उसकी नीतियां और उपयोग हमारे सिद्धांतों के अनुरूप निर्धारित किए जा सकते हैं। उन्हें आशा है कि अद्वैत वेदान्त के दर्शन और एआई के समन्वय से मानव जीवन अधिक सुगम और क्रांतिकारी दिशा में अग्रसर हो सकता है।

भविष्य में एआई मनुष्य से संवाद कर सकता है

एआई के भविष्य पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई उस स्तर तक पहुंच सकता है, जहां वह व्यवहारिक रूप से मनुष्यों के समान संवाद करने, भावनाओं को व्यक्त करने और समझने में सक्षम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह समय अधिक दूर नहीं है और संभव है कि वे स्वयं अपने जीवनकाल में इसका साक्षी बनें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले चार-पांच दशकों में भारत का तकनीकी योगदान अपेक्षाकृत सीमित रहा है, चाहे वह इंटरनेट हो, सोशल मीडिया हो या एआई का क्षेत्र। किंतु इसके बावजूद उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत भविष्य में एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा और अद्वैत के साथ उसके समन्वय द्वारा विश्व को एक उच्चतर दिशा प्रदान करेगा।

एआई मानसिक स्वास्थ्य रक्षा का व्यावहारिक साधन

चेन्नई के विद्वान संन्यासी स्वामी परम शिवानंद ने बताया कि वे वेदांत दर्शन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवा पीढ़ी के मानसिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए अथक प्रयासरत हैं।वेदांत को गहन व्यावहारिक होना चाहिए, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना संस्कृति दर्शनम् का विस्तार से परिचय दिया। इस परियोजना का उद्देश्य वेदांतिक ज्ञान को एआई और मिश्रित वास्तविकता तकनीक के माध्यम से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए व्यावहारिक साधन बनाना है।

एकत्व की भावना पर आधारित बेहतरीन स्टार्टअप्स दे सकेगा

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग ने अद्वैत और एआई के संदर्भों पर चर्चा करते हुए बताया कि हम अपने बेहतरीन दिमागों को अद्वैत की शिक्षा और इसकी अवधारणाओं से जोड़े तो हमारे पास एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास एआई का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान होगा, जो दुनिया को मूल्यों और एकत्व की भावना पर आधारित बेहतरीन स्टार्टअप्स दे सकेगा।

50 से अधिक विद्वान आचार्य वैदिक अनुष्ठान कर रहे

पंच दिवसीय एकात्म पर्व के अंतर्गत प्रतिदिन श्रृंगेरी से आमंत्रित 50 विद्वान आचार्य वैदिक अनुष्ठान कर रहे है। जिसमें विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों का शास्त्रोक्त विधि से आयोजन किया जा रहा है।

Published on:
20 Apr 2026 11:47 am
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