
- जिला अस्पताल में फाइब्रोस्कैन मशीन नहीं, मरीजों का नहीं हो पा रहा उपचार
जिले में लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवरडिजीज अब एक आम समस्या बनती जा रही है, जो बिना शराब सेवन के भी लोगों को प्रभावित कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 5 लाख 21 हजार 809 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों में फैटी लिवर के संकेत मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब दो साल से जिले के हर एक स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल में फैटी लीवर को लेकर कराई जा रही है। अब तक की जांच में 5 लाख 21 हजार 809 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों में जोखिम के संकेत पाए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार 54 हजार 429 महिलाओं और 40 हजार 409 पुरुषों की कमर का माप निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया, जो फैटी लीवर के संकेत है।
एमडी मेडिसिन डॉक्टर पंकज जैन ने बताया कि असंतुलित आहार, जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। खास बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे लोग समय पर जांच नहीं करा पाते। पेट की बढ़ती हुई चर्बी सीधे तौर पर लिवर पर असर डालती है और धीरे-धीरे यह गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।
एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आइएलबीएस दिल्ली की एक विशेषज्ञ टीम शीघ्र ही खंडवा आ रही है। यह टीम फाइब्रोस्कैन मशीन के माध्यम से लोगों की जांच कर फैटी लिवर की प्रारंभिक पहचान करेगी, जो एक सरल बिना दर्द वाली एवं प्रभावी जांच विधि है। दिल्ली के टीम 200 मरीजों को जांच करेंगी। संभवत: इसके बाद जिले में फाइब्रोस्कैन मशीन मिलने की उम्मीद है।
ब्लॉक - महिला व पुरुषों की जांच
बलडी - 20207
खालवा - 153873
छैगांवमाखन - 55372
पंधाना - 85443
हरसूद - 51230
रुरल - 49425
अर्बन - 69351
- संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। जागरूकता और समय पर उपचार से इस बढ़ती समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि समय रहते फैटी लीवर का इलाज न किया जाए, तो यह सिरोसिस और लिवर फेल्योर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। - डॉक्टर विशाल श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय असंचारी रोग।
Updated on:
19 Apr 2026 12:04 pm
Published on:
19 Apr 2026 12:04 pm
