
ओंकारेश्वर : एकात्म पर्व पर वक्ताओं ने किया संबोधित
एकात्म पर्व पर सिख संप्रदाय का सत्र आयोजित किया गया। इसमें कहा गया कि ‘ वेद ही धर्म का मूल है और सत्य का साक्षात्कार या अनुभव करना ही वास्तव में वेदांत है। गुरुनानक देव गुरुवाणी का मंगलाचरण अद्वैत से ही करते है। एक ओंकार की अनुगूंज सर्वप्रथम इसी ओंकारेश्वर की पुण्य भूमि से हुई है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. रामनाथ ने कहा कि गुरू ग्रंथ साहिब, वेदांत और संत साहित्य के संबंधों पर कहा कि संतों की वाणी वास्तव में वेदों की ही अभिव्यक्ति है। वेदों में निहित गूढ़ ज्ञान को ही संतों ने सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाया है। गुरु ग्रंथ साहिब में अनेक महान संतों की वाणी संकलित है, जो प्रत्यक्ष रूप से वेदों के मूल सिद्धांतों का ही विस्तार है। उन्होंने धर्म की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि वेद ही धर्म का मूल है और सत्य का साक्षात्कार या अनुभव करना ही वास्तव में वेदांत है। कबीर और वेदों के बीच सामंजस्य बिठाते हुए तर्क दिया कि जो सत्य वेदों में उद्घोष किया गया है, कबीर दास ने उसी सत्य को अपने अनुभव के आधार पर समाज के सामने रखा।
निर्मल अखाड़ा के महंत दर्शन सिंह ने कहा कि गुरुनानक देव गुरुवाणी का मंगलाचरण अद्वैत से ही करते है। एक ओंकार की अनुगूंज सर्वप्रथम इसी ओंकारेश्वर की पुण्य भूमि से हुई है। उन्होंने कहा कि सभी शास्त्रों के पीछे की मूल शक्ति है एक ओंकार ही है। गुरुवाणी में ब्रह्म के अनेक उदाहरण है, ब्रह्म ही इस संसार का आधार है।
स्वामी वेदतत्त्वानंद पुरी ने कहा रामकृष्ण मिशन को केवल एक संस्था के चश्मे से देखना इसकी व्यापकता को सीमित करना होगा। रामकृष्ण मिशन वास्तव में श्री रामकृष्ण और उनके मिशन का एक जीवंत विस्तार है। उन्होंने कहा कि परमहंस जैसे संत विरले होते हैं, जो यह कह सकें कि वे ईश्वर के साक्षात दर्शन करा सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, नई दिल्ली के राष्ट्र प्रमुख डॉ. बालकृष्ण पिसुपति ने कहा कि अद्वैत के श्लोक 'ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या' का आशय यह कि पर्यावरण हमसे अलग नहीं है, अपितु यह हमारा ही एक हिस्सा है इसलिए किसी भी चीज को अलग समझना भ्रम है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बाहरी मानने के कारण ही संकटों की शुरुआत होती है। बालकृष्ण जी ने कहा कि पानी और जीव-जगत किसी सीमा को नहीं मानते, लेकिन मनुष्य ने सदैव उन्हें बांटने की कोशिश की है। यही सोच पर्यावरण समस्याओं को जन्म देती है।
सौर गांधी के नाम से प्रसिद्ध चेतन सिंह सोलंकी ने अद्वैत एवं पर्यावरण विषय पर बोलते हुए कहा कि विज्ञान प्रगति कर रहा है परंतु पृथ्वी का आकार, संसाधन नहीं बढ़ रहा है और मनुष्य निरंतर मिट्टी, जल , हवा दूषित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अद्वैत कैसे पर्यावरण की रक्षा कर रहा है, सब में ब्रह्म है तो पर्यावरण दूषित क्यों हो रहा है? जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न रखे। उन्होंने कहा हमारी जरूरतें बढ़ रही है परन्तु पृथ्वी सीमित है इसलिए हमारी जरूरतें सीमित होनी चाहिए।
Published on:
19 Apr 2026 11:18 am
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