
श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती को एकात्म पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मूर्ति भेंट करते हुए
ओंकारेश्वर में मां नर्मदा की जलधारा के बीच मंत्रोच्चार के साथ आचार्य आदि शंकराचार्य की आराधना के पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किया। एकात्म पर्व के अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमिता, एआई में अद्वैत पर भी मंथन होगा।
श्री द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने एकात्म पर्व के शुभारंभ पर कहा कि जगदगुरु ने कहा कि द्वैत बुद्धि आध्यात्म का पतन है, जबकि अद्वैत बुद्धि से आध्यात्मिक का उत्थान होगा। उन्होंने एकात्म को लेकर द्वैत और अद्वैत में अंतर को बताते हुए कहा कि प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्यमान है, वही एकात्म है। उन्होंने एकात्मता को सिद्ध करने के लिए वेदों की आवश्यकता बताई और वेदांत का आश्रय लेकर ही अद्वैत व एकात्मता को सिद्ध करने पर जोर दिया। उन्होंने गौमाता, धरती माता और जन्म देने वाली माता का सम्मान आवश्यक बताया।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष निवेदिता भिड़े ने कहा कि हम सभी की आत्मा एक है और शरीर मात्र एक साधन है। उन्होंने मानव शरीर को एकात्म का सुंदर उदाहरण बताया, जिसमें कई अंग होते हुए भी चेतना एक होती है। स्वामी विवेकानंद ने विजन ऑफ वननेस की बात कही थी। हमारे ऋषियों ने कहा है कि सभी के साथ एकात्मता का व्यवहार करना धर्म का आधार है, अत: हमारी वाणी लोगों को जोडऩे वाली होनी चाहिए।
एकता न्यास के स्वामी वेदतत्वानंद पुरी ने कहा कि पांच दिवसीय एकात्म पर्व में आचार्य शंकर के अद्वैत सिद्धांत तथा विश्व शांति पर चिंतन होगा। दीक्षा समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा शंकर दूत के रूप में संकल्प लेंगे। रामकृष्ण मिशन सहित अन्य परंपराओं पर मंथन होगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अद्वैत की भूमिका पर भी विचार होगा। वेंकटेशम वेद विज्ञान पीठ से स्वामी कोपाशिवसुब्रमण्यमअबधानी ने वैदिक अनुष्ठानों के महत्व पर प्रकाश डाला। जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।
संयोजक एकता न्यास के प्रो. जयकिशोर एस. शास्त्री ने बताया कि ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची एकात्म प्रतिमा का लोकार्पण 2023 में हो चुका है। लगभग 2400 करोड़ रुपए की लागत से आचार्य शंकर का अद्वैत लोक संग्रहालय भी प्रगति पर है, जिसका उद्देश्य ओंकारेश्वर को ‘ ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस ’ बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि सिंहस्थ 2028 से पहले जनवरी से अप्रैल 2027 तक आचार्य शंकर के जन्मस्थान से 22 हजार किलोमीटर की एकात्म यात्रा निकाली जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘ वेदांत सिद्धांत चंद्रिका-विद उद्गार ’ का विमोचन किया और एकात्म धाम की यात्रा व प्रकल्प पर केंद्रित वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में एकात्म यात्रा तथा अद्वैत पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया।
-बटुक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार से अतिथियों का किया स्वागत
-700 से अधिक युवा शंकर दूत के रूप में संकल्प लेंगे।
-मुख्यमंत्री ने जगतगुरु को भेंट की आचार्य शंकराचार्य की मूर्ति
-संतों व विद्वानों को मूर्ति भेंट कर किया गया सम्मानित
-पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन।
Published on:
18 Apr 2026 11:52 am
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