
खंडवा. स्टेडियम ग्राउंड पर प्रेक्टिस करते फुटबॉल खिलाड़ी।
दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल के वल्र्ड कप का खुमार विश्वभर में छाया हुआ है। खंडवा में भी फुटबॉल के प्रति लोगों की दिवानगी कम नहीं है, लेकिन इस खेल को बढ़ावा ही नहीं मिल रहा है। कागजों पर जरूर फुटबॉल खेला जा रहा है, लेकिन स्कूल, कॉलेज के मैदानों से फुटबॉल गायब हो चुका है। एक क्लब और जिला फुटबॉल संघ इस खेल को किसी तरह से बचाए हुए है। सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी भी आगे नहीं आ रहे है।
जिले में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए निमाड़ फुटबॉल क्लब, मेहता स्पोट्र्स और जिला फुटबॉल संघ लंबे समय से संघर्षरत है। शहर में करीब 80 खिलाड़ी इस खेल से जुड़े हुए है और रोजाना मैदान पर पसीना बहा रहे है। खेल विभाग या स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से फुटबॉल को बढ़ावा देने कभी कोई प्रयास ही नहीं किया गया। स्कूल के खेल कैलेंडर में फुटबॉल को शामिल किया जाता है, लेकिन स्कूलों से टीम ही नहीं आती, और आती भी है तो महज औपचारिकता के लिए। निमाड़ फुटबॉल क्लब, मेहता स्पोट्र्स द्वारा साल में दो बार इंटर स्टेट फुटबॉल टुनार्मेंट कराया जाता है।
किसी भी खेल की नर्सरी स्कूल माना जाता है। खंडवा के एक भी सरकारी स्कूल में फुटबॉल नहीं खिलाया जाता है। कुछ निजी स्कूल जरूर फुटबॉल की प्रेक्टिस कराते थे, लेकिन वह भी कुछ समय से बंद है। फुटबॉल में रूचि रखने वाले खिलाड़ी क्लब के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखार रहे है। खंडवा से कुछ अच्छे खिलाड़ी भी निकले है, लेकिन उनळें बढ़ावा नहीं मिलने से जिला स्तर पर ही सिमट कर रह गए। एसएन कॉलेज में भी पहले फुटबॉल टीम हुआ करती थी, पिछले दो-तीन साल से कॉलेज ने भी फुटबॉल बंद कर दिया है।
फुटबॉल खिलाडिय़ों के लिए शहर में एक भी फुटबॉल ग्राउंड नहीं है। गुरुगोबिंदसिंघ स्टेडियम और एसएन कॉलेज ग्राउंड पर जरूर फुटबॉल खेला जाता है, लेकिन ये फुटबॉल के ग्राउंड नहीं है। यहां फुटबॉल की प्रेक्टिस के समय ही क्रिकेट भी खेला जाता है, लोग दो-पहिया, चार पहिया वाहन भी सीखते हैं। स्टेडियम और एसएन कॉलेज ग्राउंड पर क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, कुश्ती के आयोजन होते रहते है। इतना ही नहीं इन ग्राउंड पर दशहरे पर रावण दहन का आयोजन भी किया जाता है।
फुटबॉल को कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। क्लब के माध्यम से सांसद कप और इंटर डिस्ट्रिक्ट टुर्नामेंट जरूर कराते है। कोई ग्राउंड नहीं होने से स्टेडियम में ही प्रेक्टिस कराना पड़ती है।
कृष्णा बंसल, कोच जिला फुटबॉल संघ
किसी भी खेल के लिए 8 से 10 साल के बच्चे को तैयार करना होता है। यहां तो फुटबॉल के लिए स्कूलों में कोई व्यवस्था ही नहीं है। हम जैसे तैसे कर फुटबॉल को बढ़ावा दे रहे है। स्कूल, कॉलेज स्तर पर टुर्नामेंट होने से प्रतिभाएं भी सामने आएगी।
राहुल मेहता, जिला सचिव फुटबॉल संघ
Published on:
14 Jun 2026 11:54 am
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