
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के तीसरे दिन आखिरकार सरकार ने मांगे मान लिया है। दीपावली की एक दिन पूर्व 6 नवंबर को भोपाल से रात साढ़े आठ बजे सूचना खंडवा पहुंची तो कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई। निगम चौराहे पर रात नौ बजे सफाई कर्मचारी एकजुट हुए। सभी ने एक साथ हाथ में झाडू पकड़ा और सरकार की जय-जयकार करते हुए सफाई में जुट गए।
तीन दिन से शहर में पसरी गंदगी अब खत्म होने लगी है। शुक्रवार रात 8.30 बजे भोपाल से हड़ताल खत्म होने का संदेश आया। इसके बाद सफाई कर्मचारियों ने काम पर लौटने का ऐलान कर दिया। रात 9 बजे निगम चौराहे पर कर्मचारी एकजुट हुए। सभी ने हाथों में झाड़ू थामी। सरकार की जय-जयकार की। इसके बाद सफाई अभियान शुरू कर दिया।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत कर्मचारी तीन दिन से हड़ताल पर थे। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर काम बंद कर दिया था। इससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। बाजार से लेकर मोहल्लों तक कचरे के ढेर लग गए थे। धनतेरस का बाजार भी गंदगी के बीच लगा।
6 नवंबर को भोपाल में नगरीय प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बैठक हुई। रात करीब 8 बजे शुरू हुई बैठक में आधे घंटे तक चर्चा चली। इसके बाद मांगों पर सहमति बनी। रात 8.30 बजे इसकी सूचना खंडवा पहुंची। कर्मचारी नेताओं संजय झंझोट और राजू सुनगत ने हड़ताल खत्म होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी आठों मांगें मान ली हैं। अब कर्मचारी काम पर लौटेंगे।
निगम चौराहे से सफाई शुरू हुई। रात में ही प्रमुख मार्गों और बाजारों की सफाई की गई। बाम्बे बाजार में भी सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान उपायुक्त महिपाल सिंह सोलंकी, कार्यपालन यंत्री संजय शुक्ला, भुवन श्रीमाली, मनीष पंजाबाजी, अजय पटेल और सखाराम भट्ट मौजूद रहे।
तीन दिन की हड़ताल से शहर के प्रमुख बाजार और सार्वजनिक स्थल कचरे से पट गए थे। निगम चौराहा, बाम्बे बाजार, जलेबी चौक, आनंद नगर, इंदौर रोड, स्टेशन रोड, दधीचि पार्क और बस स्टैंड पर कचरे के ढेर लगे थे। कॉलोनियों में भी यही स्थिति रही। दुकानों के सामने कचरा जमा होने से व्यापारियों और ग्राहकों को परेशानी हुई। धनतेरस पर बाजार में खरीदारों की भीड़ रही। लेकिन सफाई नहीं होने से लोगों को गंदगी के बीच खरीदारी करनी पड़ी।
तीसरे दिन सफाई कर्मचारी जोन कार्यालय पहुंचे। यहां प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे। अपर कलेक्टर से मुलाकात की। इस दौरान निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत और उपायुक्त भी मौजूद रहे। करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई। अधिकारियों ने त्योहार का हवाला देकर सफाई शुरू करने की अपील की। कर्मचारी नेताओं ने भोपाल में होने वाली बैठक के फैसले तक इंतजार करने की बात कही।
विनियमित सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
सफाई कर्मचारियों की ठेका पद्धति पूरी तरह समाप्त हो।
आउटसोर्स नियुक्तियां बंद कर नियमित भर्ती की जाए।
पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए।
कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया जाए।
सफाई कर्मचारियों को मकान आवंटित किए जाएं।
जनसंख्या के आधार पर नए पदों का सृजन हो।
कर्मचारियों को मकानों का मालिकाना हक दिया जाए।