खंडवा

यहां स्कूल में मां सरस्वती का मंदिर, वसंत पंचमी पर माता-पिता का पूजन

वसंत (बसंत) पचंमी आज...प्रदेश में अपने आप में है ये अनूठा स्कूल।

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Jan 22, 2018
Basant Panchami 2018 or Vasant Panchami 2018 Latest News in Hindi

खंडवा. जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर बडग़ांवमाली के हाईस्कूल में मां सरस्वती का मंदिर है। इसे धार्मिकता से नहीं जोड़ते हुए संस्कारों से जोड़ा गया है। खास बात ये है कि वसंत पंचमी पर यहां माता-पिता का पूजन होता है।


जिले के शा. हाईस्कूल बडग़ांवमाली में वसंत पंचमी पर सोमवार को मां सरस्वती का पूजन, अभिषेक, कन्या पूजन व प्रसादी का आयोजन होगा। इसके साथ ही इस दिन को मातृ-पितृ पूजन दिवस भी मनाया जाएगा। छात्र-छात्राओं के माता-पिता इसमें आमंत्रित किए गए हैं।

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पिछले साल हुई थी स्थापना
वसंत पंचमी पर पिछले साल स्कूल में सरस्वती प्रतिमा की स्थापना की गई थी। तब यहां पूजन, अभिषेक, हवन हुआ था। ये प्रदेश का संभवत: पहला ऐसा सरकारी स्कूल है, जहां विद्या की देवी मां सरस्वती का मंदिर है।


एेसा है यहां का मंदिर
11 फीट ऊंचे मंदिर में राजस्थान के जयपुर से मंगाई गई श्वेत कमल पर विराजमान सवा दो फीट ऊंची मां सरस्वती की प्रतिमा की विधि-विधान से की गई थी।

...आ गया है वसंत
सारी प्रकृति जब खुशी से झुमती दिखाई दे तो समझ लीजिए कि वसंत आ गया है। मां सरस्वती की पूजन और आराधना के इस पवित्र दिन का अत्यंत महत्व है। इस दिन विद्या, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री मां शारदा विशेष आशीष प्रदान करती है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में ऋतूनां कुसुमाकर:...कहकर ऋतुराज वसंत को अपनी विभूति माना है। भगवान श्रीकृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता हैं। इसीलिए ब्रजप्रदेश में राधा-कृष्ण का आनंद-विनोद धूमधाम से मनाया जाता है। सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी के दिन आमतौर पर लोग पीले कपड़े पहनकर पूजा करते हैं। यदि यौवन हमारे जीवन का वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

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Published on:
22 Jan 2018 01:16 pm
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