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ओवर स्पीड का कहर: चार माह में 80 मौतें, सिस्टम व जागरूकता दोनों नाकाम

जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले चार महीनों में 80 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि न तो सड़कों पर पर्याप्त संकेतक हैं और न ही प्रशासन के पास इतने संसाधन कि इन हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। वहीं आम लोगों में भी ट्रैफिक नियमों को लेकर लापरवाही साफ नजर आ रही है।

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ओवर स्पीड बन रही मौत की मुख्य वजह

जिले में हो रही अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ओवर स्पीड एक प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। वाहन चालक तेज गति में नियंत्रण खो देते हैं, जिससे हादसे गंभीर हो जाते हैं। खासकर युवा वर्ग में तेज रफ्तार का बढ़ता क्रेज दुर्घटनाओं को और बढ़ा रहा है। कई मामलों में मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो रही है।

हाइवे पर बढ़ रहे हादसे

नेशनल और स्टेट हाइवे पर दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इन सड़कों पर वाहनों की रफ्तार अधिक रहती है, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। खंडवा-अमरावती स्टेट हाइवे और सनावद-पुनासा रोड पर गति सीमा तय करने के लिए कहीं भी बोर्ड नहीं लगे हैं, टर्न पर भी संकेतक नहीं लगाए गए हैं। जिससे वाहन चालकों को संभावित खतरे का समय पर अंदाजा नहीं हो पाता। रात के समय यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।

संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौती

ट्रैफिक नियमों का पालन कराने में पुलिस को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में ओवर स्पीड पर कार्रवाई के लिए केवल एक इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध है। ऐसे में पूरे जिले में प्रभावी निगरानी संभव नहीं हो पा रही है, जिससे नियमों का उल्लंघन लगातार जारी है। सीमित स्टाफ की कमी का असर भी कार्रवाई पर पड़ रहा है। खासकर स्टेट हाइवे पर लगातार कार्रवाई नहीं होने से हादसे बने हुए हैं।

जागरूकता की कमी से बढ़ रहा खतरा

लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता की कमी है। वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने के साथ ही निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है। असावधानी पूर्वक वाहन चलाना से दुर्घटनाएं हो रही है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और निर्धारित गति सीमा का पालन करने से कई जिंदगियां बचा सकते हैं।

यह बड़े हादसे

- 26 अप्रेल को ग्राम लुन्हार के पास ओवर स्पीड कार गोदाम की दीवार से टकरा गई थी। दुर्घटना में मोहित यादव (22), पुष्पक यादव (24), ऋतिक पिता धर्मेंद्र यादव (24) और पवन यादव (25) की मौत हो गई थी।

- 28 अप्रेल को इंदौर-मुक्ताईनगर हाइवे पर ग्राम भोजाखेड़ी के पास तेज रफ्तार कर डिवाइडर से टकरा गई। दुर्घटना में बुरहानपुर जिले के पटवारी ग्राम सिरपुर निवासी प्रवीण पिता रूई सिंह पवार की मौत और दो साथी, अनिल पंवार और गुलाब राठौर घायल हुए थे।

- 10 अप्रेल को भांजी की शादी से लौट रहे परिवार की आयशर पुनासा-सनावद हाइवे पर ग्राम ढोढ़वाड़ा के पास पलट गई थी। हादसे में दो लोगों की मौत व 37 लोग घायल हुए थे।

- 3 मई शहर के निकट टिठियाजोशी व जसवाड़ी के बीच ओवर स्पीड कार ने सड़क किनारे ठेले पर शिकंजी पी रहे पति-पत्नी और दो युवकों को उड़ाया था। हादसे में एक युवक की मौके पर मौत हो गई। दंपति और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

- दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ओवर स्पीड वाहनों पर चालानी कार्रवाई की जाती है। ओवर स्पीड रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही बिना हेलमेट व सीट बेल्ट का उपयोग करने के लिए लिए भी कार्रवाई के साथ समझाइश दी जा रही है। - देवेंद्र सिंह परिहार, ट्रैफिक थाना प्रभारी।