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अंतरजातीय विवाह योजना : प्रोत्साहन राशि के लिए 4 गुना बढ़े आवेदन, सवालों के घेरे में दस्तावेज

जनजातीय कार्य विभाग में अंतरजातीय विवाह योजना में प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदनों की संख्या हर साल बढ़ रही है। बीते तीन साल से आवेदन दो गुना हो गए हैं। जांच के दौरान 50 से अधिक नवविवाहितों के शपथ पत्र के दस्तावेज में अनियमितता होने का शक है। 15 से अधिक आवेदनों का सत्यापन लंबित है।

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खंडवा

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Rajesh Patel

Apr 26, 2026

Inter-caste marriage scheme

खंडवा : अंतरजातीय विवाह योजना की प्रतीकात्मक तस्वीर ( एआई फोट )

जनजातीय कार्य विभाग में अंतरजातीय विवाह योजना में प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदनों की संख्या हर साल बढ़ रही है। बीते तीन साल से आवेदन दो गुना हो गए हैं। जांच के दौरान 50 से अधिक नवविवाहितों के शपथ पत्र के दस्तावेज में अनियमितता होने का शक है। 15 से अधिक आवेदनों का सत्यापन लंबित है।

हाथ पीले करने वालों के दस्तावेज संदिग्ध

अंतरजातीय विवाह में हर साल हाथ पीले करने वाले नव विवाहिताओं की संख्या बढ़ रही है। प्रोत्साहन राशि के आवेदन तीन साल में 4 गुना हो गए हैं। इससे जहां सामाजिक समरता बढ़ने के साथ ही जातीय दीवारें टूट रहीं हैं वहीं, दूसरी ओर अंतरजातीय विवाह में सात फेरे लेने वाले नव विवाहिताओं के दस्तावेज सवालों के घेरे में आ गए हैं। दरअसल, इस योजना में प्रोत्साहन राशि के कई आवेदन ऐसे आए हैं जिनकी एक दूसरे के यहां रिश्तेदारी है। या फिर सगे संबंधियों के परिवार में आते हैं। इससे दस्तावेज शक के दायरे में है।

इस योजना में ऐसे समझें लू पोल

अधिकारियों को भी शक है कि कहीं प्रोत्साहन राशि के लिए लगातार आवेदनों की संख्या बढ़ रही है। क्योंकि इस योजना में एक लू पोल है। जिसमें एससी का प्रमाण पत्र लेते हैं। जबकि दूसरे पक्ष का सिर्फ शपथ पत्र। शेष विवाह पंजीयन और अन्य दस्तावेज से प्रत्येक जोड़े को दो लाख रुपए आर्थिक सुरक्षा के रूप में मिल रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग में 15 से अधिक आवेदनों की जांच अभी लंबित है।

इस लिए ‘ शक ’ के दायरे में दस्तावेज

अंतरजातीय विवाह योजना में एससी ( अनुसूचित जाति ) वर्ग जाति में वर या वधू दोनों में एससी जाति प्रमाण लिया जाता है। जबकि दूसरे पक्ष में सिर्फ शपथ लिया जाता है। अंतरजातीय में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, ओबीसी आदि का वर या वधू हो। इस योजना में प्रोत्साहन राशि दो लाख से ढाई लाख रुपए तक है। बढ़ते आवेदनों से दस्तावेज सवालों के घेरे में आ गए हैं। जबकि दूसरे पक्ष का भी शपथ पत्र की बजाए जाति का सत्यापन होना चाहिए।

हर साल 100 से अधिक आवेदन

जनजातीय कार्य विभाग के रिकार्ड में प्रोत्साहन राशि के लिए 4 साल पहले अधिकतम 20-25 आवेदन आते थे। बीते तीन साल में 100 से 120 आवेदन आ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 100 से अधिक आवेदन आए हैं। सत्यापन के लिए अभी 15 से अधिक आवेदन लंबित है।

जांच के दौरान कइयों के आवेदन अमान्य हो चुके

जनजातीय कार्य विभाग में अंतरजातीय विवाह योजना के आवेदनों का गाइड लाइन के तहत मंडल संयोजक, अधीक्षक और प्राचार्यों से सत्यापन कराया जाता है। जांच के दौरान दस्तावेज में त्रुटियों समेत अन्य कारणों से दस से अधिक आवेदन अमान्य घोषित किए जा चुके हैं।

इनका कहना :बजरंग बहादुर सिंह, प्रभारी, सहायक आयुक्त

मुझे अभी हाल में इस विभाग की जिम्मेदारी मिली है। इस तरह के मामले संज्ञान में अभी तक नहीं आए हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो शपथ पत्रों की जांच कराएंगे। जिससे शासन की योजना का लाभ सही व्यक्तियों को मिल सके।