
नगरीय प्रशासन के भवन अनुमति के नियमों पर हुक्मरानों के मौखिक आदेश भारी है। तभी तो माता चौक ( भंडारिया रोड ) पर बगैर अनुमति पांच कारोबारी व्यवसायिक भवनों का निर्माण शुरू कर दिया है। हैरानी की बात तो यह कि निगम कार्यालय में सैकड़ों अनुमतियां ऑनलाइन उलझी हुई है। जनता अपने निजी भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति के लिए परेशान है। आवेदन दस्तावेज की प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर निरस्त हो गए हैं।
नगरीय प्रशासन के एबीपास-3 पोर्टल पर ऑनलाइन भवन अनुमति के लिए आवेदन करना होता है। निगम की रिपोर्ट के अनुसार 17 जुलाई की स्थिति में अधिकारियों के स्तर पर 24 अनुमतियां लंबित हैं। जबकि कंसल्टेंट स्तर पर 200 से अधिक अनुमतियां हैं। जिसमें निगम ने निर्धारित समय पर राशि नहीं जमा करने पर 55 आवेदन निरस्त कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि भवन अनुमति के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में समय सीमा निर्धारित है। समय से दस्तावेज की प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर पोर्टल पर आवेदन निरस्त हो जाते हैं।
निगम के सहायक उपयंत्री दिनेश और वार्ड कीपर निर्माण स्थल पर पहुंचे। और काम पर रोक लगा दी। निगम की टीम ने कहा भवन अनुमति के बाद निर्माण शुरू कराएं। निर्माण करा रहे मौजूद लोगों ने निगम कर्मचारियों से कहा कि कलेक्टर के मौखिक निर्देश पर निर्माण चल रहा है। कागजी प्रक्रिया करेंगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निगम की टीम को निर्माण का कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके।
नजूल की भूमि पर कारोबारियों ने पांच बड़े हरे पेड़ भी काट दिए। दिलचस्प बात यह कि इसकी जानकारी आला अफसरों थी। बावजूद इसके जिम्मेदार हरे पेड़ों की कटाई करवा दी। वर्तमान समय में सरकार हरित प्रदेश महोत्सव चला रही है। बावजूद इसके नियम-कायदे आला अफसरों के ठेंगे पर है।
निगम कार्यालय में भवन की अनुमति समय सीमा में ऑनलाइन जारी हो रही है। जिनके आवेदन कंसल्टेंट स्तर पर समय सीमा में नहीं प्रक्रिया पूरी करते हैँ उनके आवेदन निरस्त हो जाता है। बगैर भवन अनुमति निर्माण के संबंध में संबंधितों को नोटिस जारी की है। जवाब आने पर जवाबदेही तय की जाएगी।
निगम में अनुमति शुल्क ।
भूमि का डायवर्सन होना जरूरी है।
प्लाट की रजिस्ट्री, नामांतरण प्रति।
आर्किटेक्ट के द्वारा तैयार किया भवन का नक्शा ।
टॉयलेट व रैन वाटर हार्वेस्टिंग की शपथ।
रेहायशी व व्यवसायिक काम्प्लैक्स के तहत पार्किंग ।