खंडवा

हाथ में भारत का संविधान, कलेक्ट्रेट परिसर में बीमार पिता को जमीन पर लिटा कर, परिवार ने मांगा एसडीएम से न्याय

-मामला जमीन विवाद का, युवक का आरोप दंबगों ने उसकी जमीन पर बना दिया मंदिर -पूर्व में 13 अगस्त को जमीन पर लोटते हुए पहुंचा था एसडीएम कार्यालय -दूसरे पक्ष ने भी 22 अक्टूबर को झांझ, मंजीरा बजाकर किया था विरोध प्रदर्शन

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Dec 18, 2024
खंडवा. जमीन पर लेटे बीमार बुजुर्ग और एसडीएम को दस्तावेज दिखाता युवक।

हाथ में संविधान की किताब, जमीन पर लेटा बीमार बुजुर्ग और न्याय के लिए एसडीएम से गुहार लगाता परिवार, ये नजारा मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई के दौरान नजर आया। एक युवक अपने पूरे परिवार के साथ न्याय मांगने पहुंचा। युवक का आरोप है कि दबंगों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर मंदिर बना दिया। अब स्थापना की तैयारी चल रही है। नायब तहसीलदार ने नोटिस जारी कर काम रोकने को कहा था, लेकिन काम नहीं रुका। संविधान में मिले हमारे अधिकार हमें मिल नहीं पा रहे हैं। यहां पहुंचे एसडीएम ने दिलासा दिया कि 10 दिन में उनकी समस्या का निराकरण करेंगे।

इसके पूर्व 13 अगस्त को भी युवक जनसुनवाई में एसडीएम कार्यालय से लोट लगाते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचा था। तब भी उसे आश्वासन दिया गया था कि 10 दिन में उसकी समस्या का निराकरण कर दिया जाएगा। दरअसल मामला यह है कि ग्राम सहेजला निवासी श्याम पिता रमेश कहार ने एसडीएम न्यायालय में एक केस लगा रखा है। जिसके अनुसान ग्राम में खसरा नंबर 343 की 0.10 डिस्मिल जमीन उसके पिता रमेश पिता पिता रामाधार की है। भूमि बंदोबस्त के समय वर्ष 1985-86 में रकबे और खसरा नंबर में हुई त्रुटि के संबंध में एसडीएम कार्यालय में उसका केस विचाराधीन है। इस भूमि पर पुराना श्रीराम मंदिर और शिव मंदिर बना हुआ है। ग्रामीण इसका जीर्णोद्धार करा रहे है, जिस पर न्यायालय के आदेश से तहसील जावर वृत्त के नायब तहसीलदार ने एसडीएम न्यायालय में प्रचलित केस के आधार पर 18 अक्टूबर को ग्रामीणों को सूचना पत्र जारी कर मंदिर निर्माण पर रोक लगाने को कहा था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पूरा गांव जनसुनवाई में पहुंचा था और झांझ मंजीरा बजाकर अधिकारियों को तिलक भी लगाया था। तब भी मामला न्यायालयीन होने की बात सामने आई थी।

जब हम मर जाएंगे, तब हमें न्याय मिलेगा
मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे श्याम और उसका परिवार हाथ में संविधान की किताब और सारे दस्तावेज लेकर पहुंचा। बीमार पिता रमेश को जमीन पर लिटा दिया। श्याम का कहना था कि रोक के बाद भी मंदिर बनकर तैयार हो गया और स्थापना होने के बाद कोई हटा नहीं पाएगा। यहां पहुंचे एसडीएम बजरंग बहादुर ने कहा कि 50 साल पुराने रिकॉर्ड ढूंढने में समय लग रहा है। यदि जमीन आपकी है तो कोई भी उस पर कब्जा नहीं कर पाएगा। परिवार की मांग पर एसडीओपी पुनासा को फोन लगाकर सहेजला में मंदिर का काम रुकवाने को भी कहा। एसडीएम के आश्वासन पर परिवार बुजुर्ग को इलाज के लिए अस्पताल ले गया।

Published on:
18 Dec 2024 12:26 pm
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