-कलेक्टर के आदेश पर भी अब तक जांच अधूरी, नहीं हो रही एफआइआर -पिपलानी सहकारिता संस्था में ग्रामीणों का करोड़ों रुपया अटका -अधिकतर किसान डूब क्षेत्र के, मुआवजे की राशि जमा कराने के बाद भटक रहे
जीवनभर की कमाई सहकारी समिति में जमा कराने के बाद अब ग्रामीण उपभोक्ता पछता रहे हैं। अपने और परिवार के भविष्य को संवारने किसी ने अपने पसीने की गाढ़ी कमाई तो किसी ने मुआवजे की लाखों रकम जमा कराई, लेकिन अब उसी रकम के लिए भटकना पड़ रहा है। मामला प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिपलानी से जुड़ा है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता भी इस मामले में जांच कर एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन सहकारिता विभाग अधिकारी दोषियों को अभयदान देने में लगे है।
अच्छे ब्याज के सपने दिखाकर जमा कराई रकम
किल्लौद ब्लॉक अंतर्गत आने वाले पिपलानी में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति द्वारा ग्रामीणों को अच्छे ब्याज के सपने दिखाकर रकम जमा कराई गई थी, लेकिन समिति प्रबंधक इसे गबन कर गए। मामला करीब 25 से 30 करोड़ की राशि का है। छह माह पूर्व जब खाता धारकों के खातों में बैलेंस शून्य हो गया, तब इसका खुलासा हुआ। मामले में लगातार शिकायतों के बाद जांच भी बैठाई गई। जिला पंजीयक सहकारिता संजय आर्य को मामले की जांच सौंपी गई है। लगभग पांच माह से अधिक का समय होने को आया है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। इधर खाताधारक अपनी रकम के लिए कलेक्ट्रेट के लगातार चक्कर लगा रहे है।
मुआवजे के 16 लाख फंसे, भटक रहा किसान
ग्राम भंवरली के किसान रामबक्श गिन्नारे इंदिरा सागर के डूब प्रभावित है। उन्हें वर्ष 2002 और 2004 में डूब का मुआवजा मिला था। रामबक्श ने अपनी पत्नी जागृति के नाम तीन अलग-अलग एफडी वर्ष 2024 में कराई थी। जिसमें सात लाख, 6.75 लाख और दो लाख कुल 16लाख रुपए जमा कराए थे। एक वर्ष में 7.25 प्रतिशत ब्याज के साथ करीब 17 लाख रुपए मिलना थे, लेकिन आज तक किसान बैंक के चक्कर लगा रहा है। समिति ने 10 लाख का चेक दिया, वह भी बाउंस होकर वापस आ गया।
30 साल पुरानी संस्था, लंबे समय से चल रहा खेल
प्राथमिक सहकारी संस्था पिपलानी करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही है। इस क्षेत्र में अधिकतर डूब प्रभावित बसे हुए है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई समिति में जमा करा रखी है। लंबे समय से घोटाले का खेल चल रहा है। समिति प्रबंधक श्रीराम राजपूत को जांच के दौरान हरसूद अटैच किया हुआ है। वहीं, इस मामले में जांच के दौरान 15 करोड़ से ज्यादा का गबन होना सामने भी आ चुका है। इसके बावजूद भी दोषी पर एफआइआर नहीं होना समझ से परे है।
कलेक्टर जता चुके नाराजगी
सहकारी समिति घोटाले को लेकर कलेक्टर ऋषव गुप्ता पिछले सप्ताह टीएल मिटिंग में अपनी नाराजगी भी जता चुके है। उन्होंने शीघ्र जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देश भी बैठक में सहकारिता विभाग अधिकारियों को दिए है। इसके बाद भी सहकारिता विभाग मामले को दबाकर बैठा हुआ है।