
जनजातीय कार्य विभाग में मंत्री विजय शाह के के प्रोटोकॉल के नाम पर हॉस्टल अधीक्षकों से दो-दो हजार रुपए वसूली के आरोप के मामले की जांच अब विभागीय स्तर पर शुरु हुई है। ऑनलाइन लेन-देन के रिकॉर्ड के आधार पर शुरू की पूछताछ निलंबित अधीक्षक हेमंत सिन्हा के खिलाफ अब विभागीय जांच शुरू हुई है। पूछताछ के दायरे में 40 से अधिक अधीक्षक आएंगे।
जनजातीय कार्य विभाग में मंत्री विजय शाह के प्रोटोकॉल के नाम पर छात्रावास अधीक्षकों से कथित रूप से दो-दो हजार रुपए वसूली के आरोप का मामला छह माह बाद फिर खुल गया है। निलंबित अधीक्षक हेमंत सिन्हा के खिलाफ अब विभागीय जांच शुरू हुई है। जांच टीम ने उन अधीक्षकों को बयान के लिए बुलाया है, जिनके साथ सिन्हा के ऑनलाइन लेन-देन के रिकॉर्ड मिले हैं। बुधवार को दस से अधिक अधीक्षक बयान दर्ज कराने जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय पहुंचे। मामले में 40 से अधिक अधीक्षकों से पूछताछ की जानी है।
जांच टीम की प्रारंभिक जांच में अधीक्षकों से पूछताछ के दौरान कुछ अधीक्षकों ने कथित लेन-देन को निजी बताया है। इससे पहले जिला प्रशासन की जांच में भी अधीक्षकों ने शपथ पत्र देकर लेन-देन को निजी ही बताया था। अब विभागीय जांच में अधीक्षकों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जिन अधीक्षकों के खातों से लेन-देन सामने आया है, उनसे बारी-बारी से पूछताछ की जा रही है। बुधवार को खार से दुर्गा पटेल, हरसूद से सतीश, भारती देवली और सुनीता कंडे, खालवा से विजय चौरे और सेवकराम साकल्ले सहित अन्य अधीक्षक बयान देने पहुंचे। आशापुर क्षेत्र की एक महिला अधीक्षक खान को भी बुलाया गया था। जांच टीम लेन-देन की वजह और कथित वसूली से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
जनजातीय कार्य विभाग में तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला की सेवानिवृत्ति के दौरान 52 छात्रावास अधीक्षकों के फेरबदल का मामला सामने आया था। आरोप था कि कई तबादला आदेश कलेक्टर के अनुमोदन के बिना जारी किए गए थे। प्रभारी मंत्री से शिकायत के बाद कलेक्टर ने सभी आदेशों को सामूहिक रूप से तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे।
प्रशासनिक जांच के दौरान तत्कालीन अधीक्षक हेमंत सिन्हा की भूमिका सामने आई थी। आरोप लगा कि उसने छात्रावास अधीक्षकों से मंत्री के प्रोटोकॉल के नाम पर दो-दो हजार रुपए लिए थे। इसके बाद सिन्हा को निलंबित कर आवासीय विद्यालय आशापुर में अटैच कर दिया गया था।
जिला प्रशासन की जांच के बाद अब हेमंत सिन्हा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई है। जांच टीम ने अधीक्षकों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, तत्कालीन सहायक आयुक्त के खिलाफ जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट शासन स्तर पर लंबित है। ऐसे में अब विभागीय जांच में अधीक्षकों के बयान अहम होगा।