मां से मिली प्रेरणा जब बेटी के जीवन का मार्ग बन जाए तो वह विरासत कहलाती है। खंडवा की संगीता ( रिंकू राठौर ) ने अपनी मां सरला से प्रेरणा लेकर शिक्षक बनने का निर्णय लिया। मां स्कूल में शिक्षक थीं। बेटी के पढ़ाई के समय मां घर पर कॉपियां जांचती थीं। उस समय संगीता भी उनके साथ बैठकर पढ़ाई करती थीं। यही दृश्य संगीता के मन में शिक्षक बनने का बीज बो गया। शादी के बाद ससुराल में भी शिक्षक परिवार मिला और मां का सपना पूरा करने शिक्षक बन गईं।
मां से मिली प्रेरणा जब बेटी के जीवन का मार्ग बन जाए तो वह विरासत कहलाती है। खंडवा की संगीता ( रिंकू राठौर ) ने अपनी मां सरला से प्रेरणा लेकर शिक्षक बनने का निर्णय लिया। मां स्कूल में शिक्षक थीं। बेटी के पढ़ाई के समय मां घर पर कॉपियां जांचती थीं। उस समय संगीता भी उनके साथ बैठकर पढ़ाई करती थीं। यही दृश्य संगीता के मन में शिक्षक बनने का बीज बो गया। शादी के बाद ससुराल में भी शिक्षक परिवार मिला और मां का सपना पूरा करने शिक्षक बन गईं।
खंडवा निवासी संगीता ( रिंकू राठौर ) नवीन प्राथमिक शाला मथेला में शिक्षक हैं। उनकी मां सरला तंवर पहले सचिवालय में बाबू थीं। खंडवा आने के बाद मां शिक्षक से हेडमास्टर बनी और अब रिटायर हो गईं। मां को घर में कॉपियां जांचते देख शिक्षक बनने का संकल्प लिया। संगीता बताती हैं कि मां चाहती थीं कि मैं भी उनकी तरह बच्चों को शिक्षा दूं।
शादी के बाद ससुराल पहुंची तो वहां भी ससुर शिक्षक थे। इस माहौल ने मां के सपने को और मजबूत किया। संगीता मानती हैं कि महिलाओं के लिए शिक्षक का पेशा सबसे सुरक्षित है। बच्चों को शिक्षा देना महादान है और यही सेवा उन्हें आर्थिक मदद भी दे रही है। मां की विरासत को आगे बढ़ाते हुए संगीता आज सुरक्षित वातावरण में शिक्षा की रोशनी फैला रही हैं।
मां से मिली प्रेरणा ने मेरी राह आसान कर दी। मां के साथ बैठकर पढ़ना ही मेरे शिक्षक बनने का आधार बना। आज मैं बच्चों को शिक्षा देकर मां की विरासत आगे बढ़ा रही हूं। यह सेवा सुरक्षित भी है और जीवन को संबल देने वाली भी है। संगीता कहती हैं। पिता व भाई वकील हैं। ससुराल में पिता भी शिक्षक हैं।