
बुधवार को करीब दो घंटे धरना देने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं ने रैली भी निकाली। धरना प्रदर्शन और रैली के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा आज करो, अभी करो, हमको परमानेंट करो। कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को सौंपा।
10 प्रमुख मांग रखी ज्ञापन में
ज्ञापन में महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 5000 रुपए मासिक पेंशन, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, मानदेय में वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति, कार्य के दौरान मृत्यु होने पर 5 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने तथा पदोन्नति के अवसर बढ़ाने सहित 10 सूत्रीय मांगें प्रमुख रूप से शामिल हैं।
कार्यकर्ता शासन की महत्वपूर्ण कड़ी
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री प्रवीण शर्मा ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के साथ-साथ जनगणना, मतदाता पुनरीक्षण, लाड़ली बहना योजना, स्वास्थ्य सर्वेक्षण एवं अन्य शासकीय कार्यक्रमों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अल्प वेतन पर निरंतर दे रहीं सेवाएं
उन्होंने कहा कि प्रदेश की लाखों आंगनवाड़ी बहनें वर्षों से अल्प मानदेय में निरंतर सेवाएं दे रही हैं। शासन को उनकी न्यायोचित मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की जिला अध्यक्ष शीला फूलमाली के नेतृत्व में सविता सिंह, चंद्रकांता प्रजापति, संध्या सूर्यवंशी, रश्मि दीदी, प्रीति वर्मा, कामिया बघेल सहित जिले के सभी विकासखंडों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।