भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र एवं राज्य सरकार की श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में हुंकार भरते हुए बुधवार को विरोध दिवस मनाया। भामसं के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने मिलकर रैली निकाली और धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर को सौंपा।
विरोध दिवस पर भामसं के संघ पदाधिकारी और कार्यकर्ता बुधवार दोपहर स्टेडियम ग्राउंड में एकत्रित हुए और यहां से रैली के रूप में कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पहुंचे। यहां करीब आधा घंटा धरना प्रदर्शन कर वक्ताओं ने संबोधित किया। इसके बाद दोबारा रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। भामसं ने श्रमिकों एवं कर्मचारियों की लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक, विभिन्न यूनियनों के कर्मचारी, संघों एवं महासंघों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह रखी मांग
ज्ञापन में औद्योगिक संबंध संहिता में श्रमिक हितों की सुरक्षा, इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस का आयोजन, त्रिपक्षीय समितियों का पुनर्गठन, योजना एवं संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन 7500 प्रतिमाह करने, बैंकिंग क्षेत्र में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने तथा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।
इसके अतिरिक्त मप्र में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के नियमितीकरण, मानदेय का समय पर भुगतान, सेवा निवृत्ति उपरांत पेंशन एवं आकस्मिक मृत्यु पर आर्थिक सहायता प्रदान करने, विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती एवं वेतनमान विसंगतियों के निराकरण की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
यह रहे शामिल
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजीव मालवीय, जिला सहमंत्री राकेश मालवीय, विधि सलाहकार सुभाष केशोरे, कार्यालय मंत्री योगेश पटेल, शीला फूलमाली, अश्विन सैनी, एनके सोनी, प्रफुल्ल मंडलोई, जितेंद्र देसला, मिथुन नीलकंठ, धर्मेंद्र मेवाड़ा, पंकज पंवार, केके शर्मा, करण बिवाल, मनीष शर्मा, निलेश निदाने, बंशीलाल देसला, निकिता श्रीवास, चंद्रकांता प्रजापति, रश्मि चौकड़े, रचना शर्मा, सविता सिंह, प्रीति वर्मा आदि अन्य संगठन से पदाधिकारी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जिला मंत्री प्रवीण शर्मा ने कहा कि यदि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा।