दो घंटे तक चली उठापटक के बाद हुआ पटाक्षेप : निगम के स्वास्थ्य व वाहन शाखा प्रभारी, जोन प्रभारी व ड्राइवर पहुंचे आरपीएफ थाना, आरपीएफ टीआई से एक घंटे की चर्चा के बाद बोले निगम अफसर- जमीन का था कन्फ्यूजन, कर लिया दूर
खंडवा. ड्यूटी कर रहे हमारी जेसीबी के ड्राइवर के साथ मारपीट हुई और आरपीएफ की टीम उसे थाने तक ले आई। नगर निगम अफसरों के इस बात पर आरपीएफ थाना टीआई ने सवाल दाग दिया- आपने मारते हुए देखा क्या? बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद जब निगम अफसर बाहर आए तो बोले- जमीन को लेकर कन्फ्यूजन था, इसे दूर कर लिया गया है। ड्राइवर को भी अब छोड़ दिया जाएगा।
शुक्रवार शाम करीब 3.45 बजे करीब मालगोदाम से आरपीएफ को सूचना मिली कि रेलवे की जमीन पर जेसीबी से खुदाई हो रही है। इसके बाद आरपीएफकर्मी और टीआई जय सिंह पहुंचे। निगम के जेसीबी ड्राइवर अनिल सिसौदिया को लेकर थाने आ गए। निगम के जोन प्रभारी मनीष पंजाबी, जाकिर अहमद और धीरज दवे सबसे पहले पहुंचे। इनकी सूचना पर प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी मो. शाहीन खान, वाहन शाखा प्रभारी भूपेंद्र सिंह बिसेन, जोन प्रभारी अजय पटेल, भुवन श्रीमाली, सखाराम भट्ट सहित वाहनों के करीब दो दर्जन ड्राइवर पहुंच गए।
रार-तकरार से शुरूआत, सुलह-समझाइश पर खत्म
आरपीएफ टीआई के कक्ष में प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी, वाहन शाखा प्रभारी व जोन प्रभारी की बातचीत रार-तकरार से हुई। मनीष पंजाबी ने कहा कि आप हमारे ड्राइवर को उठाकर ले आए, मारपीट हुई। ये तरीका सही नहीं है। इसके बाद करीब एक घंटे तक चर्चा चलती रही। बाहर निकलकर प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी मो. शाहीन खान ने कहा कि निगम व रेलवे की जमीन लगी हुई है। मृत मवेशी का निष्पादन करने पहुंचे ड्राइवर को कन्फ्यूजन हो गया था। ड्राइवर को भी छोड़ देंगे। हमें जानकारी मिली थी कि ड्राइवर से मारपीट हुई है। टीआई ने कहा कि मारपीट नहीं की है।
तीन घंटे बाद माफीनामा लिखाकर ड्राइवर को छोड़ा
निगम के अफसरों के जाने के भी एक घंटे बाद शाम को करीब 7 बजे जेसीबी ड्राइवर को छोड़ा गया। उससे माफीनामे पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। इसमें लिखा था कि वो जमीन किसकी थी, ये हमें पता नहीं था। उधर, आरपीएफकर्मियों ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि ड्राइवर को जब रोका जा रहा था तब वो जेसीबी स्टार्ट कर भागने लगा, इसलिए उसे पकड़ा। मारपीट जैसी कोई बात नहीं है। टीआई जयसिंह ने कहा कि मैं ऑन रिकॉर्ड कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा, इसके लिए मंडल के पीआरओ से संपर्क करना पड़ेगा।