खंडवा

टीकाकरण : दुधारू पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका, 3.50 पशुओं तक नहीं पहुंची गलघोंटू की टीम

पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही के कारण पशुओं के सिर पर मौसमी बीमारियां मंडरा रही हैं। चालू सीजन में अभी तक गलघोंटू का टीका नहीं लगाया जा सका है। इससे दुधारू पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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Jul 19, 2026
vaccination of animals
खंडवा : पशुओं में गलघोंटू का टीकाकरण करते पशु चिकित्सक ( फोटो एआई )

पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही के कारण पशुओं के सिर पर मौसमी बीमारियां मंडरा रही हैं। चालू सीजन में अभी तक गलघोंटू का टीका नहीं लगाया जा सका है। इससे दुधारू पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

दुधारू पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका

मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए दुधारू पशुओं ( गाय, भैंस, भेड़, बकरी ) में गलघोंटू का टीका लगाए जाने की रफ्तार धीमी है। 18 जुलाई बीतने के बाद भी टीम अभी 3.50 लाख पशुओं तक नहीं पहुंची है। जबकि गलघोंटू का टीका मानसून यानी बारिश शुरू होने से पहले टीकाकरण हो जाना चाहिए। समय से टीका नहीं लगाए जाने से पशुओं में मौसमी बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ नीरज कुमुद का कहना है कि गलघोंटू का टीका करीब 30 हजार पशुओं में लगाया जा चुका है। शेष में लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

एफएमडी : 91 % पशुओं में लगाया जा चुका टीका

जिले में मौसमी बीमारी से बचाव के लिए दुधारू गैर दुधारू पशुओं ( गाय, भैंस, भेड़, बकरी ) को गलघोंटू का टीका लगाया जाना है। शिथिलता के चलते अभी तक टीम 3.85 लाख पशुओं में से 3.50 पशुओं तक नहीं पहुंची है। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार पशुओं को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए गलघोंटू की तरह खुरपका-मुंहपका ( एफएमडी ) का टीका का भी टीका लगाता है। एफएमडी का टीका बीते मई माह में ही 91 फीसदी पशुओं में लगाया जा चुका है। करीब 55 हजार पशुओं को टीका नहीं लगा है। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि खुरपका-मुंहपका ( एफएमडी ) का टीकाकरण 91 फीसदी ( करीब 3.30 लाख ) पशुओं में हो चुका है।

पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने को प्रमुख टीके

पशुओं को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने प्रमुख टीके में खुरपका-मुंहपका ( एफएमडी ) का टीका साल में दो बार लगाया जाता है। जिससे पशुओं में संक्रामक बीमारी नहीं होती है। गलघोंटू ( एचएस ) का टीका साल में एक बार देना अनिवार्य है। जबकि लंगड़ा बुखार ( बीक्यू ) का टीका भी समय पर लगवाना जरूरी है। मादा बछडिय़ों को ब्रुसेलोसिस का टीका उनके जीवन में केवल एक बार 4 से 8 महीने की उम्र में लगाया जाता है।

इनका कहना : छतर सिंह डावर, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं

एफएमडी का टीका लग चुका है। एचएस का टीका लगाने का कार्य भी जल्द शुरू करेंगे। वर्तमान समय में अभी दुग्ध समृद्धि योजना पर फोकस है। बीमारी की सूचना कहीं से नहीं है। गलघोंटू का टीका समय-समय पर लगाया जा रहा है। टीकाकरण कार्य जल्द तेज करेंगे।

Updated on:
19 Jul 2026 11:50 am
Published on:
19 Jul 2026 11:50 am