खंडवा

ठगों ने सालभर में उड़ाए 3.88 करोड़, 14 लाख मिले, 70.43 लाख होल्ड पर

सायबर अपराध को लेकर जागरूकता में कमी से लोग अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धो बैठ रहे हैं। एक छोटी से लापरवाही बैंक खाता खाली कर रही है। एक तरह से डिजिटल लेन-देन के बढ़ते प्रचलन के साथ सायबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। जिले में बीते एक वर्ष में सायबर अपराधियों ने 3 करोड़ 88 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस और सायबर सेल की सक्रियता से 70 लाख 43 हजार रुपए होल्ड कराए गए और 14 लाख रुपए पीड़ितों को वापस भी दिलाए गए हैं, लेकिन बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।

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Feb 26, 2026
शहर में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा दो मामलों में ठगों ने ज्यादा मुनाफे और सस्ते सोने का लालच देकर दो लोगों से कुल 1 करोड़ 57 लाख 99 हजार रुपये की ठगी कर ली।
  • ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी शेयरिंग और एपीके फाइल डाउनलोड कराकर की ठगी

जिले में सायबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक वर्ष में अलग-अलग माध्यमों से लोगों से 3.88 करोड़ रुपए की ठगी की गई। इनमें ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी शेयरिंग और एपीके फाइल डाउनलोड कराकर ठगने के मामले हैं। ठग खुद को बैंक कर्मचारी, कस्टमर केयर अधिकारी या सरकारी योजना का प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद वे केवाईसी अपडेट, इनाम या खाते में गड़बड़ी का हवाला देकर लिंक या फाइल भेजते हैं। जागरूकता की कमी से अनजाने में तो कोई लालच में सायबर ठगों का शिकार बना हैं।

शिकायत में देरी से एक बड़ी रकम अपराधियों तक पहुंची

सायबर सेल की तत्परता से 70.43 लाख रुपए की राशि को समय रहते होल्ड कराया गया, जिससे वह अपराधियों के खातों में पूरी तरह ट्रांसफर नहीं हो सकी। वहीं 14 लाख रुपए की राशि पीड़ितों को वापस भी कराई गई है। लेकिन एक बड़ी रकम अपराधियों तक पहुंच गई। बताया जाता है कि शिकायत में देरी से रुपए एक से अधिक खातों में पहुंचकर निकल भी गए। पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला की जिस खाते में रुपए डाले थे वह खाली है। इस तरह के अधिकांश मामले हैं जिसमें पीडि़त एक माह बाद शिकायत लेकर आए हैं।

जागरूकता की कमी सबसे बड़ा कारण

जागरूकता की कमी सायबर ठगी बढ़ने का प्रमुख कारण है। कई लोग अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक कर लेते हैं या मोबाइल पर भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड कर लेते हैं। एपीके फाइल इंस्टॉल होते ही ठग मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और बैंकिंग ऐप, यूपीआइ व ओटीपी की जानकारी चुरा लेते हैं। इसके साथ मैसेज फॉरवर्ड ऐप भी इंस्टाल कर देते हैं, जिससे मोबाइल पर आने वाले हर एक मैसेज ओटीपी नंबर सभी ठगों को फॉरवर्ड हो जाते हैं।

ऑनलाइन एफआईआर कहां दर्ज करें

- सायबर ठगी की शिकायत तुरंत राष्ट्रीय सायबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें।

- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाएं।

- पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित विकल्प चुनकर आवश्यक जानकारी भरें।

- शिकायत दर्ज करने के बाद प्राप्त रसीद या शिकायत नंबर सुरक्षित रखें।

- आवश्यकता होने पर नजदीकी थाने या जिले की सायबर सेल में भी संपर्क करें।

सतर्कता व बचाव

- किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल पर ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, नेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआइ पिन साझा न करें।

- बैंक, पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर की गई कॉल पर तुरंत भरोसा न करें, पहले आधिकारिक नंबर पर पुष्टि करें।

- मोबाइल पर भेजी गई किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें।

- सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग या वित्तीय लेन-देन करने से बचें।

- किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की तुरंत जांच करें और बैंक को सूचित करें।

- सायबर अपराध से जागरूकता ही बचाव है। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार प्रयास किए जाते हैं। स्कूल, कॉलेज व सार्वजनिक कार्यक्रम करके लोगों को सायबर जागरूकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। - मनोज कुमार राय, पुलिस अधीक्षक।

Updated on:
26 Feb 2026 11:58 am
Published on:
26 Feb 2026 11:57 am
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