प्रदेशभर में लगातार हो रही स्लीपर बस दुर्घटनाओं के बाद भी जिले में यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है। जिले से गुजरने वाली और संचालित होने वाली कई निजी स्लीपर बसें नियमों की अनदेखी करते हुए यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही हैं। क्षमता से अधिक सवारियां, इमरजेंसी गेट की कमी, अग्निशमन यंत्रों का अभाव और तकनीकी खामियों के बावजूद इन बसों का संचालन बदस्तूर जारी है।
खंडवा से अहमदाबाद, भोपाल, पुणे, सूरत और नागपुर सहित अन्य शहरों के लिए रोजाना स्लीपर बसें संचालित होती हैं। इनमें से कई बसों में परिवहन विभाग द्वारा तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। इंदौर बायपास मार्ग पर स्लीपर बसों का यार्ड हैं। यहां से संचालित हो रही अधिकांश बसों में अग्निशमन यंत्र गायब हैं तो कुछ के एक्सपायर हो गए हैं। बस में दो सीटों के बीच इतनी भी जगह नहीं है कि लोग यहां से निकल सके। एक दूसरे से टकराकर लोग निकल रहे। एक बार में एक ही व्यक्ति निकल सकता है। आमने-सामने निकलने में परेशानी हो रही है। यात्रियों का कहना है कि आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए उचित रास्ते उपलब्ध नहीं हैं। बसों में सीटों के बीच दूरी कम होने से हादसे की स्थिति में भगदड़ का खतरा बना रहता है।
हाल ही में प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्लीपर बसों में आग लगने और सड़क हादसों की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बावजूद जिले में परिवहन विभाग की ओर से व्यापक जांच अभियान नहीं चलाया गया। जिससे बस संचालकों के हौसले बढ़े हुए हैं। इसके साथ ही बसों के ऊपर भारी भरकम लगेज भरा हुआ होता हैं। इसमें क्या सामान परिवहन किया जा रहा है यह तक पुलिस को नहीं पता होता।
इधर ट्रैफिक पुलिस द्वारा यात्री बसों की लगातार चेकिंग की जा रही है। अब तक 15 बसों के चालान बनाए गए हैं। अग्निशमन यंत्र नहीं होने और इमरजेंसी डोर नहीं खुलने पर कार्रवाई की।
- स्लीपर बसों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। नियम सबसे के लिए बराबर है। शीघ्र ही विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई करेंगे। - दीपक माझी, एआरटीओ।