
अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस 2026 मना रहे हैं। लेकिन अभी तक सिंगल-यूज पॉलीथिन पर लगाम नहीं लग सकी है। प्रतिबंध होने के बावजूद इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ट्रेचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन पहुंचने वाले 35 से 40 टन सूखे-गीले कचरे में दो टन से अधिक पॉलीथिन निकल रही है।
निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन कचरे की सफाई में पॉलीथिन का ढेर लग रहा है। बाजारों में किराना, सब्जी और फुटकर दुकानों से लेकर हाथ-ठेलों तक हर तीसरे ग्राहक के हाथ में पॉलीथिन बैग दिखाई देता है। ग्राउंड पर कचरे के साथ पहुंच रही पॉलीथिन से अनुमान है कि शहर में रोजाना दो टन से अधिक पॉलीथिन की खपत हो रही है। जिसमें करीब 80 प्रतिशत सिंगल-यूज प्लास्टिक शामिल है। संस्थाओं के जागरूकता के बावजूद नियंत्रण नहीं हो रहा है।
आनंद नगर के किराना व्यापारी सिद्धार्थ चिंटू बताते हैं कि अब वे 90 से 120 माइक्रोन की मानक पॉलीथिन के साथ जूट और कागज के बैग का उपयोग कर रहे हैं। सब्जी विक्रेता सोहनलाल का कहना है कि अधिकांश ग्राहक कपड़े का थैला लेकर नहीं आते, इसलिए मजबूरी में पॉलीथिन देनी पड़ती है। उनका मानना है कि यदि पॉलीथिन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगे तो इसका उपयोग स्वतः कम हो जाएगा।
पशु चिकित्सकों के अनुसार शहर में घूमने वाली कई गायों के पेट में 10 से 12 किलोग्राम तक पॉलीथिन मिल रही है। तत्कालीन सहायक संचालक पशु चिकित्सा एवं सेवाएं रहे डॉ. हेमंत शाह बताते हैं कि पोस्टमार्टम के दौरान गायों के पेट से पॉलीथिन, रस्सियां और कपड़े निकले हैं। पॉलीथिन पेट में जमा होने से गायों की पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, पेट फूल जाता है और वे केवल रोटी ही खा पाती हैं। हरा या सूखा चारा पचाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
नगर निगम ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर 500 से अधिक लोगों पर चालानी कार्रवाई की है। अलग-अलग अभियानों में दो क्विंटल से अधिक पॉलीथिन जब्त की गई और लोगों को पेपर बैग भी वितरित किए गए। इसके बावजूद शहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह नहीं रुक पाया है।
निगम ने प्लास्टिक मुक्त के प्रति जागररूकता को लेकर सार्वजनिक स्थलों पर ‘ प्लास्टिक लाओ चाय पीओ ’ का अभियान शुरू किया है। पहले दिन बस स्टैंड पर जागरूक किया गया। यहां दस से पंद्रह लोग आगे आए। इसी तरह गुरुवार को भी अलग-अलग जगहों पर बीस से अधिक लोग पहुंचे। जिन्हें निगम कर्मचारियों ने प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने जागरूक किया।
प्रतिदिन ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंच रहा 35-40 टन कचरा।
कचरे के ढेर में दो टन से अधिक पॉलीथिन रोज निकल रही।
80 % उपयोग सिंगल-यूज प्लास्टिक का।
500 से अधिक लोगों पर चालानी कार्रवाई।
दो क्विंटल से अधिक पॉलीथिन जब्त।
गायों के पेट से 10-12 किलो तक पॉलीथिन मिलने का मामला।
सिंगल-यूज प्लास्टिक के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। चालानी कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके लिए नागरिकों और व्यापारियों को आगे आना होगा। सहयोग से ही पॉलीथिन के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।