
निगम के विकास कार्यों में लिप्त ठेकेदार किस तरह की गुणवत्ता का कार्य कर रहे है, इसका उदाहरण देखना है तो हाल ही में बने पदमकुंड से नया बस स्टैंड मार्ग देख सकते है। करीब 250 मीटर लंबे रोड का लोकार्पण भी दादाजी मेले के पूर्व हुआ था। दो माह भी पूरे नहीं हुए कि यह रोड उखडऩे लगा है। विपक्ष ने रोड निर्माण को लेकर ठेकेदार और निगम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए है।
कायाकल्प योजना के तहत नगर निगम द्वारा झीलोद्यान से पदमकुंड तक रोड का जीणोद्धार और पदम कुंड से नया बस स्टैंड तक नए रोड का निर्माण करीब 45 लाख रुपए की लागत से कराया गया है। बस स्टैंड के पास से रोड शुरू होते ही एक बड़ा गड्ढा हो गया है और आसपास दरारें भी पड़ गई है, जो उखडऩे की तैयारी में है। वहीं, पदम कुंड की ओर रोड पर करीब तीन फीट का गड्ढा हो गया है। उखड़े रोड को देखकर साफ लग रहा है कि यहां मानक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं किया गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रोड एक साल भी नहीं टिक पाएगा।
रोड निर्माण को लेकर शुरू में कई अड़चनें भी आई थी। रोड के लिए आ रही निजी जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई भी लंबे समय तक अटकी रही। सारी बाधाओं को दूर कर निगम ने इसका टेंडर निकाला और रोड का काम शुरू कराया। ठेकेदार ने आनन-फानन में गुरु पूर्णिमा से पहले रोड बनाकर तैयार कर दी। रोड बनने के बाद निगम ने खूब वाहवाही भी लूटी थी। अब रोड के उखड़ते ही निगम ठेकेदार पर कार्रवाई की बात कर रहा है।
निगम में हो रहे निर्माण कार्यों में शहर से ज्यादा ठेकेदारों का विकास हो रहा है। सिर्फ नया बस स्टैंड रोड ही नहीं शहर के कई रोड की हालत खराब है। विकास के नाम पर जनता को छला जा रहा है।
दीपक मुल्लू राठौर, नेता प्रतिपक्ष