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ओंकारेश्वर के घाटों पर मौत का खतरा! 24 श्रद्धालुओं की जान गई, फिर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं

-20 से अधिक घटनाओं में श्रद्धालुओं की बची जान -लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर भी नहीं ले रहे सबक -सिर्फ समझाइश के अलावा घाटों पर कोई व्यवस्था नहीं
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खंडवा

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Manish Arora

Aug 20, 2026

Omkareshwar Narmada Ghats

ओंकारेश्वर. केवलराम घाट पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के घाट श्रद्धालुओं के लिए असुरक्षित होते जा रहे है। एक जनवरी से लेकर अब तक यहां कुल 24 श्रद्धालु स्नान के दौरान गहरे पानी में जाने से अपनी जान गंवा चुके है, जिसमें अधिकतर युवा शामिल है। इसका मुख्य कारण नर्मदा घाटों पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होना है। यहां एसडीईआरएफ और होमगार्ड जवान जरूर तैनात है, लेकिन श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की समझाइश ही दे रहे है। स्थानीय लोगों की मांग है कि घाटों पर सुरक्षा जाली लगाई जाए।

घाटों से दूर जा कर नहा रहे श्रद्धालु

मंगलवार को ओंकारेश्वर के केवलराम घाट पर लखनऊ उत्तर प्रदेश के शुभ तिवारी की डूबने से मौत होने के बाद एक बार फिर ओंकारेश्वर के घाटों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है। इस घटना में तीन अन्य युवकों को एसडीईआरएफ और स्थानीय नाविको ने बचा लिया था। ओंकारेश्वर में डूबने की घटनाओं में मुख्य कारण श्रद्धालुओं का घाट से दूर जाकर गहरे पानी में स्नान करना सामने आ रहा है। ओंकारेश्वर में नर्मदा कई जगह उथली तो कई जगह गहरी होने, घाटों पर पानी कम होने से श्रद्धालु आगे बढकऱ स्नान कर रहे है और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है। एसडीईआरएफ और स्थानीय नागरिक करीब 40 घटनाओं में 55 से अधिक लोगों को बचा भी चुके हैं, लेकिन गहरे पानी में डूबने वालों को नहीं बचा पाए।

पिछले तीन माह की प्रमुख घटनाएं

-28 मई को छिंदवाड़ा निवासी जयवर्धन टोपले की गहरे पानी में डूबने से मौत।
-15 जून अमरावती महाराष्ट्र निवासी राहल देशपांडे की पिछला घाट पर डूबने से मौत
-13 जुलाई बैतूल छिंदवाड़ा निवासी जयप्रकाश पाटेकर की डूबने से मौत
-15 जुलाई राजस्थान सालासर निवासी महावीर कुमार की डूबने से मौत
-18 अगस्त लखनऊ उत्तर प्रदेश निवासी शुभ तिवारी की डूबने से मौत

हरिद्वार की तरह नहरों की व्यवस्था हो

हरिद्वार में जैसी नहरो की व्यवस्था है, वैसे ही ओंकारेश्वर के घाटों पर भी नहर बनाना चाहिए जिससे श्रद्धालु गहरे पानी में ना जा सके। घाटों पर ऐसी व्यवस्था करना चाहिए जिससे कि श्रद्धालु गहरे पानी में पहुंच ही ना सके।
महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरी महाराज, अन्नपूर्णा आश्रम

पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ नाव तैनात हो

सुरक्षा नाव हमेशा घाटों पर तैनात रहना चाहिए, उसमें बचाने के सभी उपकरण, अनाउंसमेंट, गोताखोर, लाइव सपोर्ट सिस्टम आदि से लैस होना चाहिए। बैठक में मैंने यह सुझाव दिया लेकिन, अभी तक उसे पर अमल नहीं हुआ।
लीलाधर खंडेलवाल, पूर्व अध्यक्ष नगर परिषद

प्रशासन करें सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता

बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को पता नहीं होता कि कहां गहरा है, कहां पानी कम है। प्रशासन को घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना चाहिए। अनाउंसमेंट से कुछ नहीं होता, कोई उसे सुनता भी नहीं, सुरक्षा जाली लगानी चाहिए।
महामंडलेश्वर शिवगिरी महाराज, ओम शांति आश्रम

घटना की जिम्मेदारी तय होना चाहिए

जिम्मेदारी तय होना चाहिए, यदि कोई डूब कर मारता है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन हो यह तय जब तक नहीं होगा तब तक यूं ही श्रद्धालु घाटों पर डूबते रहेंगे। विभाग एक दूसरे पर पल्ला झाड़ कर अपनी जवाबदारी से बच निकलते हैं
टीकम चौकसे, कांग्रेस नेता, पूर्व पार्षद

श्रद्धालुओं को सख्ती से रोका जाना चाहिए

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाट पर मौजूद एसडीईआरएफ जवान सिर्फ श्रद्धालुओं को पानी में आगे नहीं जाने की समझाइश ही देते है, सख्ती से किसी को नहीं रोका जाता। सबसे ज्यादा दुर्घटना वाले केवलराम घाट, गौमुख घाट पर एक-एक ही जवान तैनात रहता है, इनकी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। आपात स्थिति के लिए चिकित्सा व्यवस्था भी होना चाहिए। घाट पर खंभे लगाकर जंजीर भी बांधी जाना चाहिए, जिससे लोग पानी की हद समझ जाए और आगे नहीं जा पाए।

लोग नहीं मानते समझाइश को

घाटों पर तार लगा रखे हैं, कई घाटों पर तय जगह से आगे जाना भी प्रतिबंधित है, जिसके बाद भी लोग आगे चले जाते है। कई बार समझाइश देने के बाद भी लोग नहीं मानते और चट्टानों पर जाकर स्नान करते है। जिससे दुर्घटनाएं हो रही है।
अनोक सिंह सिदिया, थाना प्रभारी मांधाता