
सिंगाजी धाम दे सकता है धार्मिक पर्यटन को नई पहचान
बीड़ गांव के पास स्थित संत सिंगाजी महाराज का सिंगाजी धाम धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रदेशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। तीन तरफ से पानी से घिरे इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के साथ जल और प्रकृति पर्यटन की भी संभावनाएं हैं। इंदिरा सागर बैकवाटर में बोटिंग, आसपास के जंगल और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। यदि यहां सुविधाएं विकसित की जाएं, तो श्रद्धालुओं के साथ परिवार और प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को भी जोड़ा जा सकता है।
चारखेड़ा में प्रकृति, जंगल और बोटिंग का संगम
हरसूद क्षेत्र में इंदिरा सागर के बैकवाटर किनारे चारखेड़ा इको टूरिज्म स्पॉट भी अपनी अलग पहचान रखता है। वन विभाग ने यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की हैं और बटरफ्लाई पार्क भी मौजूद है। प्राकृतिक वातावरण, जंगल और जल क्षेत्र इसे इको टूरिज्म के लिए उपयुक्त बनाते हैं। जरूरत है कि यहां नियमित पर्यटन गतिविधियों, बेहतर सुविधाओं और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाए। ऐसा होने पर चारखेड़ा की पहचान आसपास के जिलों से निकलकर प्रदेश और देश के पर्यटकों तक पहुंच सकती है।
हनुवंतिया के साथ बोरियामाल को भी मिल सकती है नई जिंदगी
हनुवंतिया टापू ने कभी खंडवा को देश के पर्यटन मानचित्र पर अलग पहचान दिलाई थी। जल पर्यटन और प्राकृतिक वातावरण के कारण इसे मिनी गोवा के नाम से भी पहचान मिली। अब यहां पर्यटन गतिविधियों को फिर से गति देने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी क्षेत्र में स्थित बोरियामाल टापू भी चारों तरफ पानी से घिरा आकर्षक स्थल है। इसे विकसित कर पर्यटकों के लिए तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ यहां की व्यवस्थाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
एक सर्किट और कई क्षेत्रों में रोजगार की राह
इन स्थलों को अलग-अलग विकसित करने के बजाय एक पर्यटन सर्किट के रूप में जोड़ने की पहल जिले की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सिंगाजी धाम में धार्मिक पर्यटन, चारखेड़ा में इको टूरिज्म और हनुवंतिया-बोरियामाल में जल पर्यटन को एक साथ जोड़ा जा सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय बाजार, बोटिंग, जिप्सी सफारी और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बनेंगे। स्थानीय युवाओं को गाइड, ड्राइवर औ नाव संचालन से जुड़े काम मिल सकते हैं।