
Khandwa News :मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा महान गायक-अभिनेता किशोर कुमार की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके गृह नगर खंडवा में दो दिवसीय राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह और गीत - संगीत संध्या का आयोजन शरु हो रहा है। 12-13 अक्टूबर यानी आज और कल शहर के पुलिस ग्राउंड में ये देशव्यापी आयोजन हो रहा है। आयोजन में पहले दिन यानी आज स्थानीय युवा कलाकार किशोर कुमार के सदाबहार गीतों से समां बांधेंगे, जबकि दूसरे दिन यानी कल देशभर के कई कलाकारों को राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा।
मध्य प्रदेश शासन द्वारा किशोर कुमार की स्मृति में साल 1997 से राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान आयोजित कराया जा रहा है। ये सम्मान सिनेमा के क्षेत्र में निर्देशन, अभिनय, पटकथा लेखन और गीत लेखन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को दिया जाता है। आज और कल होने वाले दोनों दिन के कार्यक्रम शाम 7 बजे से शुरू होंगे और दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क होगा। तो आइये इस अवसर पर हम हरफन मौला किशोर कुमार से जुड़े पांच दिलचस्प किस्सों के बारे जानते हैं।
मूल ररूप से खंडवा के रहने वाले किशोर दा को अपने शहर बड़ा प्यार था। किशोर कुमार जब कभी भी रोई स्टेज-शो किया करते, तब हमेशा अपने संबोधन से पहले हाथ जोड़कर कहा करते- 'मेरे दादा-दादियों। मेरे नाना-नानियों। मेरे भाई-बहनों, तुम सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम। नमस्कार।' ऐसे ही अपने शहर से लगाव का एक अन्य उदाहरण ये भी था कि, उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी मधुबाला से शादी के बाद मजाक करते हुए कहा था- 'मैं दर्जनभर बच्चे पैदा कर खंडवा की गलियों में उनके साथ घूमना चाहता हूं।'
किशोर कुमार ने अपनी हायर एजुकेशन इंदौर से की। वो शहर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ते थे। यहां उन्हें रहकर पढ़ना था, लेकिन इस अवधि में उन्हें अपने घर और अपने शहर से दूर रहना इस कदर अखरता, कि जब सप्ताह के आखिरी दिन जैसे ही उनकी क्लास छूटती वो दौड़ते हुए स्टेशन पहुंचते और बेहद उस्ताह के साथ अपने घर के लिए निकल पड़ते। वो हर सप्ताह मीटरगेज ट्रेन का सफर करते हुए खंडवा आते थे। सफर के दौरान जब ट्रेन रुकती तो वे स्टेशन पर बोगी बदल लिया करते और मुसाफिरों के साथ घुल-मिलकर गाने सुनाते हुए घर लौटते। ये उनके खुशी-खुशी घर लौटने का एक उदाहरण है। उनके अद्भुत गायन से अन्य यात्री भी खुश हो जाते और सभी का सफर हंसते-झूमते कट जाता था।
किशोर कुमार भले ही फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा सितारा थे, लेकिन वो खुद को बॉलीवुड की पार्टीज और चकाचौंध से दूर रखना ही पसंद करते थे। लेकिन, उन्हें अपने शहर खंडवा की दूध-जलेबी बेहद पसंद थी। वो हमेशा ये कहा करते थे कि, जब वो फिल्मों से संन्यास लेंगे तो खंडवा में जाकर ही बस जाएंगे।
किशोर कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। मधुबाला ने काफी कम उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनकी अंतिम सांस तक किशोर कुमार ने उनका हाथ और साथ दोनों ही नहीं छोड़ा। किशोर कुमार ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था कि, जब मधुबाला बीमार थीं तो वो बेड पर लेटे-लेटे काफी परेशान हो जाती थीं और मैं उन्हें हमेशा हंसाने और खुश रखने की कोशिश करता था।'
दिग्गज सिंगर लता मंगेशकर को किशोर कुमार काफी मानते थे। जब भी वो लता मंगेशकर के साथ कोई गाना किया करते तो प्रोड्यूसर उनकी फीस के बारे में पूछा करते थे। ऐसा कहा जाता है कि, किशोर दा प्रोड्यूसर से हमेशा ये कहते कि, रिकॉर्डिंग के लिए लता जी को जितना पैसा दिया गया है, मेकर्स उन्हें उससे एक रुपए कम दें।