खंडवा

Mid-Day Meal : स्कूलों में तेल-मसाला के साथ रसोइया का 3.21 करोड़ मानदेय अटका

स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए भोजन पकाने वाली रसोइया तीन माह से मानदेय का इंतजार कर रही हैं। दूसरी ओर, भोजन तैयार करने वाले समूह तेल, मसाले और सब्जियां उधार लेकर व्यवस्था चला रहे हैं। स्कूलों में उधार के तेल, मसाला से बच्चों के लिए भोजन पकाने का कार्य किया जा रहा है। दशहरा-दिवाली के त्योहार से पहले रसोइया और समूहों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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Oct 17, 2026
midday meal
खंडवा : स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्रों में मध्यान्ह भोजन पकाती रसोइया, फोटो एआई

स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए भोजन पकाने वाली रसोइया तीन माह से मानदेय का इंतजार कर रही हैं। दूसरी ओर, भोजन तैयार करने वाले समूह तेल, मसाले और सब्जियां उधार लेकर व्यवस्था चला रहे हैं। स्कूलों में उधार के तेल, मसाला से बच्चों के लिए भोजन पकाने का कार्य किया जा रहा है। दशहरा-दिवाली के त्योहार से पहले रसोइया और समूहों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

केंद्रीय पोर्टल अपडेशन में अटकी प्रक्रिया

जिले में रसोइया के 3.21 करोड़ रुपए से अधिक के मानदेय के भुगतान लंबित हैं। जबकि इससे अधिक सामग्री की राशि अटकी हुई है। केंद्रीय पोर्टल पर खातों को जोडऩे और बिलों की ऑनलाइन प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हो रही है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बिल लगाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। भुगतान जल्द होने की उम्मीद है। लेकिन जुलाई से सितंबर तक की राशि नहीं मिलने से रसोइया और भोजन बनाने वाले समूहों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नवरात्रि के साथ अब दशहरा और दिवाली के त्योहार से उनकी चिंता और बढ़ गई है।

स्कूलों में तीन करोड़ से अधिक का मानदेय लंबित

जिले में 1400 सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में रसोइया और सहायकों की मदद से बच्चों के लिए भोजन पकाया जाता है। इनके मानदेय पर हर माह करीब 1 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। जुलाई से सितंबर तक तीन माह का 3 करोड़ रुपए से अधिक का मानदेय लंबित है। इसके अलावा भोजन बनाने के लिए तेल, मसाले, सब्जियां और अन्य सामग्री खरीदने की इससे अधिक राशि अटकी है। समूह संचालक दुकानदारों से उधार सामग्री लेकर व्यवस्था चला रहे हैं। कुछ समूहों ने भुगतान मिलने की उम्मीद में परिचितों और कारोबारियों से कर्ज भी लिया है।

रसोइया के 21 लाख, साझा चूल्हा का एक करोड़ अटका

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में भोजन बनाने वाली रसोइया का हर माह करीब 7 लाख रुपए मानदेय बनता है। जुलाई, सितंबर तक तीन माह का मानदेय 21 लाख रुपए होता है। विभागीय जानकारी के अनुसार, जुलाई और अगस्त के लिए 14 लाख रुपए के बिल लगाए गए हैं। अभी तक रसोइया के खाते में नहीं पहुंचा है। जबकि सितंबर का भुगतान अभी लंबित है। वहीं, साझा चूल्हा व्यवस्था के तहत भोजन तैयार करने वाले समूहों को सामग्री खरीदी की राशि भी नहीं मिली है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस मद में जुलाई और अगस्त माह का 70 लाख रुपए का भुगतान लंबित है। सितंबर की राशि जोडऩे पर बकाया एक करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगा। रसोइया के मानदेय और साझा चूल्हा की राशि मिलाकर महिला एवं बाल विकास विभाग में 1.21 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान लंबित है।

उधार में चल रही व्यवस्था, भुगतान की समय सीमा नहीं

भोजन बनाने वाले समूहों के सामने सबसे रोजमर्रा की सामग्री जुटाना मुश्किल होता है। दुकानदारों का बकाया बढ़ रहा है। रसोइया को मानदेय नहीं मिलने से घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। तीन माह से भुगतान लंबित होने के बाद भी विभागीय स्तर पर भुगतान की स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है। अब सवाल यह है कि केंद्रीय पोर्टल की प्रक्रिया पूरी कर राशि कब जारी होगी और उधार में चल रही भोजन व्यवस्था को कब राहत मिलेगी।

जिम्मेदार बोले...

आनंद स्वरूप शर्मा, प्रबंधक, आजीविका मिशन

भुगतान ऑनलाइन प्रक्रिया हाे रहा है। जुलाई माह के बिल की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही शेष भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

रत्ना शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी

जुलाई और अगस्त का बल ट्रेजरी में लगा दिया है। तीन से चार दिन में भुगतान हो जाएगा।

Updated on:
17 Oct 2026 12:08 pm
Published on:
17 Oct 2026 12:07 pm