
मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में प्रतिदिन 600 से 700 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। गुरुवार भी सुबह से मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी रही। ओपीडी कक्ष में अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर रणजीत बड़ोेले सहित अन्य डॉक्टरों के सामने मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। यहां बिना मास्क मरीज संक्रमण को बढ़ाते हुए नजर आए। इसी तरह से निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। एक तरह से प्रतिदिन करीब 2 हजार लोग वायरल संक्रमण जैसे लक्षणों के साथ डॉक्टरों तक पहुंच रहे हैं।
इन्फ्लूएंजा ए अधिक गंभीर
इन्फ्लूएंजा वायरस मुख्य रूप से ए, बी और सी प्रकार का होता है। इनमें इन्फ्लूएंजा ए को अधिक गंभीर माना जाता है। यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल सकता है। बारिश के दौरान मौसम में बदलाव, नमी और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें
इन्फ्लूएंजा की शुरुआत अचानक तेज बुखार और ठंड लगने से हो सकती है। इसके बाद खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों में उल्टी या दस्त की समस्या भी हो सकती है।
- वायरस से बचाव के लिए हाथों को साबुन से बार-बार धोना, खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढंकना और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना जरूरी है। बीमारी के लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करे। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार बिगड़ती तबीयत होने पर बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाए। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवा नहीं लें। - डॉक्टर ओपी जुगतावत, सीएमएचओ।