मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार को मातृ-मृत्यु दर की रोकथाम को लेकर चिकित्सकों ने मंथन किया। शनिवार को अस्पताल में त्रैमासिक बैठक में दो प्रसूताओं की मौत की डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर चिकित्सकों ने चर्चा की। गायनी विभाग की त्रैमासिक बैठक पंधाना क्षेत्र की प्रसूता की डेथ आडिट रिपोर्ट पर गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ निशा पवार ने रिपोर्ट पर कहा कि प्रसूता का प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में गहराई तक प्रत्यारोपित हो जाती है।
जिले में प्रसूताओं में खून की कमी और ब्लड प्रेशर अधिक होने के कारण मृत्यु हो रही है। त्रैमासिक समीक्षा में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार जिले में एक लाख बच्चों को जन्म देने वाली माताओं में से 134 की मृत्यु हो रही है। प्रदेश स्तर पर मृत्यु का रेशियो 173 प्रसूताओं का है। प्रसूता में ब्लड प्रेशर बढ़ने से गर्भाशय की दीवार में गहराई तक प्रत्यारोपित हो जाती है। इससे प्लेसेंटा ( आवल ) अपनी जगह से घिसक जाता है। कई बार बच्चे दानी के मुंह पर आने के कारण प्रसव के दौरान प्रसूता की मृत्यु हो जाती है। गायनी विभाग की त्रैमासिक बैठक के दौरान पंधाना क्षेत्र की प्रसूता की डेथ आडिट रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार को मातृ-मृत्यु दर की रोकथाम को लेकर चिकित्सकों ने मंथन किया। शनिवार को अस्पताल में त्रैमासिक बैठक में दो प्रसूताओं की मौत की डेथ ऑडिट रिपोर्ट पर चिकित्सकों ने चर्चा की।
गायनी विभाग की त्रैमासिक बैठक पंधाना क्षेत्र की प्रसूता की डेथ आडिट रिपोर्ट पर गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ निशा पवार ने रिपोर्ट पर कहा कि प्रसूता का प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में गहराई तक प्रत्यारोपित हो जाती है। तो यह समस्या पैदा होती है। ऐसा तब होता है, जब इससे पहले सिजेरियन ऑपरेशन हुआ हो। और बच्चे की डिलिवरी के बाद भी प्लेसेंटा गर्भाशय से जुड़ा ही रहता है। ऐसे स्थिति में मृत्यु का कारण बनता है। समीक्षा के दौरान गायनी विभाग में गत माह पंधाना की प्रसूता की मौत के कारण पर चर्चा हुई।
डेट आडिट रिपोर्ट अनुसार प्रसूता में खून की कमी, रक्तस्राव अधिक होने के साथ ही डिलीवरी के समय हाइपरटेंशन के कारण मृत्यु हुई। इसी तरह बुरहानपुर से रैफर होकर आए केस पर चर्चा की गई। प्रसूता को देर से रैफर किए जाने का कारण आया है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरडी बाकोरिया नेदिसंबर 2024 एवं जनवरी 2025 में जो मातृ मृत्यु दर हुई है, उसकी समीक्षा की गई। त्रैमासिक रिपोर्ट में चिकित्साें के मंथन के बाद लगातार सुधार हो रहा है। प्रस्तुत रिपोर्ट के दौरान पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष में अभी तक 17 मौतें कम हुईं। पिछले साल 39 मौतें हुई थीं। चालू वर्ष अप्रैल से पांच फरवरी तक 22 मौतें हुई हैं। इस साल भी मार्च तक का समय शेष है। बैठक के दौरान चिकित्सकों की संयुक्त बैठकों में लिए जा रहे मृत्यु दर पर कमी लाने का प्रयास सफल हो रहा है।
बैठक में मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट डॉ. रंजीत बडोले ने बताया कि समन्वय से मातृ मृत्यु दर की समीक्षा की गई। सिविल सर्जन डॉ. कौशल ने कहा कि प्रथम मृत्यु दर के कारण का पता लगाकर आगे की रणनीति बनाना होगा। उन्होंने मातृ मृत्यु होने पर 24 घंटे में उसकी विस्तृत जानकारी बनाकर प्रस्तुत करें। इसके अलावा प्रभारी सीएमएचओ डॉ. रश्मि कौशल ने मातृ मृत्यु दर की रिपोर्ट पर चिकित्सकों को समन्वयन बनाकर कार्य करने का सुझाव दिया। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरडी बाकोरिया, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी डूडवे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।