MP news mental health alert: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित रमण आश्रम के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रमण ने आज के युवाओं की मनोस्थिति पर कही बड़ी बात, बोले- युवा जहां भी हैं आत्म-विचार करें...
MP News Mental Health Alert: 'महर्षि रमण दुनिया की हर समस्या को 'स्वयं या आत्मा' तक ले गए। उनकी शिक्षाओं की सबसे बड़ी खूबी प्रत्यक्ष अनुभव है। 'मैं कौन हूं' पुस्तक में 28 सरल प्रश्न हैं, जिन्हें पढ़कर युवा आसानी से स्वयं चेतन होकर जान सकते हैं कि वे क्या हैं और क्या कर सकते हैं। आज दुनिया में जो युद्ध हो रहे हैं, वे शासकों के अहंकार की वजह से हैं।'
ये बातें ओंकारेश्वर में आयोजित एकात्म पर्व में आए रमण आश्रम के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रमण ने कही। यहां पढ़ें उनसे चर्चा के प्रमुख अंश-
Q. महर्षि रमण की अद्वैत दृष्टि युवाओं के लिए कैसे प्रासंगिक है?
-महर्षि रमण शास्त्रों को पढ़कर अद्वैत तक नहीं पहुंचे थे, बल्कि अपने 'मृत्यु के अनुभव' के बाद सीधे आत्म-साक्षात्कार में स्थित हो गए थे। आज हम एआइ की बात करते हैं, लेकिन यह भी मनुष्य की बुद्धि और उसकी आत्मा की रोशनी से ही निकला है। यदि युवा अपने अहंकार को धीरे-धीरे कम करें, तो उनकी आंतरिक ऊर्जा और एकाग्रता (Mental Health Alert)बढ़ेगी। अहंकार ही हारने का डर और दर्द पैदा करता है।
Q. आज का युवा डिप्रेशन और एंग्जायटी में घिरा है। इससे कैसे बाहर आए?
-महर्षि रमण की 'मैं कौन हूं' पुस्तक में 28 सरल प्रश्न हैं, जिन्हें पढ़कर युवा स्वयं आत्मचिंतन कर समाधान पा सकता है। महर्षि हमें केवल 'भीतर' की ओर मुडऩे का निर्देश देते हैं। वे हमारे शरीर को ही मंदिर मानते थे, इसलिए युवा जहां भी हों, चाहे यूनिवर्सिटी में हों या कैटीन में आत्म-विचार (Mental Health Alert) कर सकते हैं।
Q. प्रतिस्पर्धा और द्वेष की भावना बढ़ रही है। क्या अद्वैत के 'एकत्व' में इसका उपाय है?
-महर्षि का प्रसिद्ध कथन है 'देयर आर नो अदर्स'। जब आप यह जान लेते हैं कि जो आत्मा मुझमें है, वही आपमें है, तो आपकी खुशी में ही मेरी खुशी होगी। आज जो भी युद्ध हो रहे हैं, वे केवल शासकों के अहंकार के कारण हैं। यदि अहंकार नष्ट हो जाए, तो मतभेद मिट जाएंगे।
Q. आदि शंकराचार्य और महर्षि रमण के ज्ञान और शिक्षा को किस रूप में देखते हैं?
-महर्षि रमण ने सीधे अनुभव से अपनी शिक्षाएं दी हैं। उनकी शिक्षाएं सीधी और सरल हैं। महर्षि कहते थे कि ईश्वर, गुरु और आत्मा एक ही हैं। आदि शंकराचार्य और महर्षि रमण में कोई अंतर नहीं है। जब सनातन धर्म का पतन हो रहा था, तब आदि शंकराचार्य आए, इसलिए उन्हें काफी कुछ लिखना और तर्क करना पड़ा। महर्षि रमण ने स्वयं कहा है कि उनकी शिक्षाएं आदि शंकराचार्य के निष्कर्षों से पूरी तरह मेल खाती हैं।