खंडवा

ओंकारेश्वर में सुबह से क्यों छाया सन्नाटा? यात्री हो रहे परेशान

Omkareshwar Bandh : विकास मंजूर, लेकिन रोजगार पर संकट नहीं... ओंकारेश्वर आज से दो दिन बंद, रहवासियों ने आजीविका पर संकट के चलते उठाया कदम। होटल, दुकानें, नावें और ऑटो सबकुछ बंद।
2 min read
Omkareshwar Bandh
ओंकारेश्वर में दो दिवसीय बंद (फोटो सोर्स: Patrika)

Khandwa News :मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के नर्मदा तट पर बसी तीर्थनगरी ओंकारेश्वर की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां हजारों परिवारों का पुश्तैनी निवास और रोजगार भी इसी तीर्थ से जुड़ा है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों से प्रभावित परिवारों की 19 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन से सहमति नहीं बनने के बाद नगरवासियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। आज सोमवार 19 अक्टूबर से दो दिवसीय बंद के आह्वान के बाद सारे बाजार बंद हैं।

ऐसे में यहां आने वाले खासकर श्रद्धालुओं को खरीदारी से संबंधित टीजों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने जगह जगह पानी की व्यवस्था की हुई है, ताकि यहां आने वालों को कम से कम प्यास से परेशान न होना पड़े।

सम्मानजनक पुनर्वास की मांग

ओंकारेश्वर के स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर स्पष्ट कहना है कि, वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनके घर, पुश्तैनी व्यवसाय और आजीविका पर संकट स्वीकार नहीं करेंगे। नगरवासियों की प्रमुख मांगों में उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार की सुरक्षा और विस्थापन से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। रहवासियों का कहना है कि, वर्षों से ओंकारेश्वर में रहकर परिवार पालने वाले लोगों को उजाडऩे से पहले उनके भविष्य की चिंता करना भी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।

19 मांगों पर सहमति नहीं, बंद का निर्णय

स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन के सामने 19 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। डुकिया में प्रस्तावित पुनर्वास को लेकर भी लोगों में चिंता है। उनका कहना है कि, अगर उन्हें धार्मिक स्थल और पर्यटन गतिविधियों से दूर बसाया गया तो इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ेगा। नगरवासियों का तर्क है कि, ओंकारेश्वर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तीर्थयात्रियों पर निर्भर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, फूल-प्रसादी की दुकानें, नौका संचालन, ऑटो रिक्शा और तीर्थकर्म से हजारों लोगों की आजीविका चलती है। ऐसे में पुनर्वास की योजना बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

होटल से लेकर नाव संचालन तक बंद

पं. नवलकिशोर शर्मा, पं. सुनील शर्मा, संतोष गोस्वामी, चंपा बाई, दिनेश पेंटर, पार्षद राजेश यादव, संजय पाराशर, चेतन खंडेलवाल, गजेंद्र अग्रवाल सहित अन्य रविवार शाम को बंद कराने का आह्वान करने निकले थे। बंद के समर्थन में होटल, रेस्टोरेंट, धार्मिक सामग्री की दुकानें, फूल-प्रसादी, नौका संचालन और ऑटो रिक्शा सहित तीर्थयात्रियों को सेवाएं देने वाले कारोबार बंद रखे गए हैं। ऑटो यूनियन, पंडा संघ, नाविक संघ और व्यापारी संघ ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए आज सुबह से अपने कारोबार बंद रखे हैं।

चाय-नाश्ते, प्रसादी के लिए परेशान हो रहे तीर्थयात्री

बंद का व्यापक रूप देखने को मिल रहा है। देशभर से ओंकारेश्वर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भोजन, प्रसादी, स्थानीय परिवहन और नर्मदा पार करने के लिए नाव जैसी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे तीर्थनगरी की धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय व्यापार प्रभावित हो रहा है।

विकास चाहिए, लेकिन स्थानीय लोगों की कीमत पर नहीं

आंदोलन के दौरान नगरवासियों ने एकजुटता का संदेश देते हुए 'एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे' का नारा बुलंद किया। उनका कहना है कि, सिंहस्थ 2028 की तैयारियां और तीर्थनगरी का विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्थानीय परिवारों के अधिकारों, भावनाओं और भविष्य को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Updated on:
19 Oct 2026 02:18 pm
Published on:
19 Oct 2026 02:18 pm