19 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रेत परिवहन में अनदेखी…ई-ट्रांजिट एक्सपायर, फिर भी हाइवे पर दौड़ रहे रेत के डंपर

शहर की सड़कों पर रेत से भरे डंपर नियमों को धता बताकर दौड़ रहे हैं। कहीं नंबर प्लेट गायब है तो कहीं वाहन क्रमांक धुंधले हैं। कई डंपरों में बॉडी से ऊपर तक रेत भरी जा रही है। एक ही ई-ट्रांजिट ( पिटपास ) पर एक से अधिक डंपर चल रहे हैं । ओवरलोड वाहनों के नंबर भी धुंधले हैं। यही नहीं ओवरलोडिंग के बाद भी खनिज के जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। एक डंपर जब्त कर औपचारिकता निभाई है। कई माह जिला टॉस्क की संयुक्त कार्रवाई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
2 min read
Google source verification

खंडवा

•

image

Rajesh Patel

•

Oct 19, 2026

sand transportation

खंडवा : होशंगाबाद से खंडवा तक रेत का ओवरलोड परिवहन ।

शहर की सड़कों पर रेत से भरे डंपर नियमों को धता बताकर दौड़ रहे हैं। कहीं नंबर प्लेट गायब है तो कहीं वाहन क्रमांक धुंधले हैं। कई डंपरों में बॉडी से ऊपर तक रेत भरी जा रही है। एक ही ई-ट्रांजिट ( पिटपास ) पर एक से अधिक डंपर चल रहे हैं । ओवरलोड वाहनों के नंबर भी धुंधले हैं। यही नहीं ओवरलोडिंग के बाद भी खनिज के जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। एक डंपर जब्त कर औपचारिकता निभाई है। कई माह जिला टॉस्क की संयुक्त कार्रवाई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

होशंगाबाद से खंडवा में रेत का नियम अनदेखी परिवहन

होशंगाबाद से खंडवा तक धड़ल्ले से रेत परिवहन हो रहा है। शनिवार को चेकिंग के दौरान एक डंपर की ई-ट्रांजिट की वैधता 12 घंटे पहले ही खत्म मिली। महिला खनिज इंस्पेक्टर कंचना दांडेकर ने दोपहर करीब 12.30 बजे हरसूद रोड पर केंद्रीय विद्यालय के पास डंपर जब्त किया। खनिज कार्यालय के सामने खड़े डंपर के चालक के अनुसार, वह एक दिन पहले होशंगाबाद से रेत भरकर रवाना हुआ था। रात 12 बजे पिटपास की समय-सीमा समाप्त हो गई। ज्यादातर डंपरों का यही हाल है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि रोजाना शहर पहुंच रहे दूसरे डंपरों की जांच किस तरह हो रही है। आखिर नियमों को पालन क्यों नहीं हो रहा है।

रोज 15 से 20 डंपरों से शहर में पहुंच रही रेत

शहर में प्रतिदिन करीब 15 से 20 डंपर रेत की खपत होने का अनुमान है। रविवार दोपहर भी रेत से भरे कई डंपर शहर में प्रवेश करते दिखाई दिए। जांच की आशंका के चलते एक डंपर चालक ने संचालक से बात की और जनपद कार्यालय के सामने रोपड़ी के पास वाहन खड़ा कर दिया। इससे परिवहन की निगरानी और जांच व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

नंबर धुंधले, पहचान करना भी मुश्किल

खनिज अमले के द्वारा एक्सपायर पिटपास के दौरान पकड़े गए डंपर के आगे-पीछे का वाहन क्रामांक धुंधला है। पूरी तरह अपठित है। किसी तरह का नंबर प्लेट नहीं लिखा है। ये कहानी अकेले इस डपंर की नहीं बल्कि रेत का परिवहन करने वाले कई डंपरों के आगे और पीछे के नंबर स्पष्ट नहीं हैं। कुछ वाहनों में नंबर प्लेट तक नहीं लगी है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान और उन पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वाहनों की ऑनलाइन जानकारी की जांच के साथ मौके पर रोककर दस्तावेजों का सत्यापन भी जरूरी है।

ग्रीन पर्दे की आड़ में ओवरलोडिंग

शहर में प्रवेश करने वाले कई डंपरों में बॉडी से ऊपर तक रेत भरी दिखाई देती है। रेत को ढंकने के लिए ऊपर हरा पर्दा लगाया जाता है। ऐसे में वाहन की वास्तविक लोडिंग और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण है। ओवरलोडिंग और दस्तावेजों की अनियमितता पर कार्रवाई की जिम्मेदारी खनिज विभाग के साथ संबंधित अन्य अमले की भी है।

टास्क टीम गठित, फिर भी कार्रवाई नहीं

रेत परिवहन की निगरानी के लिए एसडीएम, पुलिस, आरटीओ और खनिज विभाग के अधिकारियों को शामिल कर जिला टास्क कमेटी बनाई गई है। इसके बावजूद संयुक्त रूप से कार्रवाई नहीं हो रही है। स्थानीय स्तर पर पिछले कई माह से संयुक्त जांच टीम एक साथ फील्ड में नहीं उतरी। ऐसे में सवाल उठता है कि टास्क कमेटी ने संयुक्त रूप से वाहनों की एक साथ जांच करने फील्ड में पहुंचेगी।

इनका कहना : दीक्षा भगोरे, डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी खनिज अधिकारी

अभी मैं जिले से बाहर हूं। वाहनों की नियमित चेकिंग होती है। इंस्पेक्टर ने एक दिन पहले एक डंपर जब्त किया है। उसका चालान प्रस्तुत किया जाएगा।