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विकास मंजूर, लेकिन रोजगार पर संकट नहीं… ओंकारेश्वर आज से दो दिन बंद, रहवासियों ने आजीविका पर संकट के चलते उठाया कदम

सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से प्रभावित परिवारों की 19 सूत्रीय मांगों पर नहीं बनी सहमति; होटल, दुकानें, नावें और ऑटो बंद रखने का आह्वान ‘एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’ के नारे के साथ एकजुट हुए नगरवासी
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खंडवा

•

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Manish Arora

•

Oct 19, 2026

Omkareshwar Band

ओंकारेश्वर. नगर बंद करने के लिए एक दिन पूर्व सूचना देने निकले नगरवासी।

नर्मदा तट पर बसी तीर्थनगरी ओंकारेश्वर की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां हजारों परिवारों का पुश्तैनी निवास और रोजगार भी इसी तीर्थ से जुड़ा है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों से प्रभावित परिवारों की 19 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन से सहमति नहीं बनने के बाद नगरवासियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। आज सोमवार, 19 अक्टूबर से नगर में बंद का आह्वान किया गया है।

सम्मानजनक पुनर्वास की मांग

ओंकारेश्वर के स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनके घर, पुश्तैनी व्यवसाय और आजीविका पर संकट स्वीकार नहीं करेंगे। नगरवासियों की प्रमुख मांगों में उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार की सुरक्षा और विस्थापन से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। रहवासियों का कहना है कि वर्षों से ओंकारेश्वर में रहकर परिवार पालने वाले लोगों को उजाडऩे से पहले उनके भविष्य की चिंता करना भी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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19 मांगों पर सहमति नहीं, बंद का निर्णय

स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन के सामने 19 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। डुकिया में प्रस्तावित पुनर्वास को लेकर भी लोगों में चिंता है। उनका कहना है कि यदि उन्हें धार्मिक स्थल और पर्यटन गतिविधियों से दूर बसाया गया, तो इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ेगा। नगरवासियों का तर्क है कि ओंकारेश्वर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तीर्थयात्रियों पर निर्भर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, फूल-प्रसादी की दुकानें, नौका संचालन, ऑटो रिक्शा और तीर्थकर्म से हजारों लोगों की आजीविका चलती है। ऐसे में पुनर्वास की योजना बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

होटल से लेकर नाव संचालन तक बंद रखने का आह्वान

पं. नवलकिशोर शर्मा, पं. सुनील शर्मा, संतोष गोस्वामी, चंपा बाई, दिनेश पेंटर, पार्षद राजेश यादव, संजय पाराशर, चेतन खंडेलवाल, गजेंद्र अग्रवाल सहित अन्य रविवार शाम को बंद कराने का आह्वान करने निकले। बंद के समर्थन में होटल, रेस्टोरेंट, धार्मिक सामग्री की दुकानें, फूल-प्रसादी, नौका संचालन और ऑटो रिक्शा सहित तीर्थयात्रियों को सेवाएं देने वाले कारोबार बंद रखने का आह्वान किया गया है। ऑटो यूनियन, पंडा संघ, नाविक संघ और व्यापारी संघ ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।

चाय-नाश्ते, प्रसादी को भी तरसेंगे तीर्थयात्री

यदि बंद व्यापक रूप से प्रभावी रहता है, तो देशभर से ओंकारेश्वर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भोजन, प्रसादी, स्थानीय परिवहन और नर्मदा पार करने के लिए नाव जैसी सुविधाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे तीर्थनगरी की धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय व्यापार भी प्रभावित होने की आशंका है।

विकास चाहिए, लेकिन स्थानीय लोगों की कीमत पर नहीं

आंदोलन के दौरान नगरवासियों ने एकजुटता का संदेश देते हुए ‘एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे’ का नारा बुलंद किया। उनका कहना है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियां और तीर्थनगरी का विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्थानीय परिवारों के अधिकारों, भावनाओं और भविष्य को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।