
Omkareshwar Latest News- खंडवा जिले का ओंकारेश्वर इन दिनों फिर चर्चाओं में है। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल होने के बावजूद यहां आए दिन श्रद्धालुओं के साथ घटना-दुर्घटना होती रहती है।ताजा मामला मेंटेनेंस के अभाव में झूला पुल की एक रॉड टूट गई। इसके बाद श्रद्धालुओं का आवागमन इस पुल से बंद कर दिया गया है।
ओंकारेश्वर में मंदिर जाने के लिए दो ब्रिज हैं। इनमें से एक पुल की लोहे की रॉड टूट गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेंटेनेंस नहीं होने का असर देखने को मिलता है। भीड़ को नियंत्रण करने के लिए भी प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है। इसके अलावा नाव संचालन व्यवस्था पर किसी का नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि कई बार यहां हादसे हो जाते हैं, श्रद्धालुओं की मौत होती है तो मुआवजा देकर शांत करा दिया जाता है, जांच के भी आदेश होते हैं, लेकिन जांच में क्या हुआ उसके बारे में कभी किसी को नहीं बताया जाता।
ताजा मामला ओंकारेश्वर और ममलेश्वर जाने वाले झूला पुल का है। यहां झूला पुल की एक कड़ी टूट गई। अचानक क्षतिग्रस्त हुए इस पुल के कारण प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हादसे की आशंका को देखते हुए फिलहाल इस पुल से श्रद्धालुओं का आना-जाना बंद कर दिया गया है। इसे लेकर खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने ओंकारेश्वर के अधिकारियों से रिपोर्ट ली है। पुलिस बल की भी तैनाती ब्रिज पर कर दी गई है।
12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख ओंकारेश्वर महादेव मंदिर में दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं। यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। ऐसी स्थिति में यहां कई बार दुर्घटनाएं होती रहती है। पत्रिका भी कई बार सरकार और प्रशासन को अलर्ट करता रहा है। आइए जानते हैं ओंकारेश्वर में हुई अब की बड़ी घटनाओं के बारे में…।
19 जुलाई 1993 को सोमवती अमावस्या थी। उस समय हजारों की संख्या में श्रद्धालु आए थे। तभी झूला पुल पर करंट फैलने की अफवाह उड़ गई। जिससे वहां भगदड़ मच गई। गैर सरकारी सूत्रों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 20 थी, लेकिन प्रशासन ने 6 महिलाओं के मरने और 28 लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी। तब सभी को 20-20 हजार रुपए बांटकर मामले को शांत करा दिया था। तब जांच रिपोर्ट को 15 दिनों में पेश करने के आदेश हुए थे। लेकिन 21 साल बाद भी उस जांच का पता नहीं चल सका।
ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी पर बने झूला पुल का तार फरवरी 2023 में भी टूट गया था। जिला प्रशासन ने आवागमन रोक दिया था। प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठे थे। लोगों को मोरबी हादसे की आशंका नजर आने लगी थी। एक्सपर्ट्स ने मुआयना किया था, रिपेयर करने के बाद इसे चालू किया गया था। बताया गया था कि झूला पुल का जो तार टूटा गया था वो पुल के किनारे पर बांध कर रखे जाने वाले तारों में से एक था। यह तार पुल को लटकाने वाले ऊपर के बीम को बांधे रखता है। इस पुल से आवागमन बंद कर दिया गया था। हालांकि दूसरे दिन इसे रिपेयर कर दिया गया था। इस पुल का निर्माण 2004 में हुआ था।
यहां दूरदराज से आने वाले ऊंकार पर्वत के दर्शन करने के लिए नाव से यात्रा करते हैं। नर्मदा नदी की यहां गहराई अधिक है और कई बार यहां घटनाएं हो चुकी हैं। कई लोग डूब जाते हैं और कई नाव पलट जाती है। इसलिए यहां हर समय गोताखोर भी तैनात रहते हैं।
पिछले साल फरवरी को भी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में एक बोट पलटते-पलटते बच गई थी। इसमें कुछ सेकंड के लिए घबरा गए थे, लेकिन सभी सुरक्षित बच गए। इस पूरे मामले का भी वीडियो सामने आया था। इस मामले में भी एसडीएम ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन इस जांच का क्या हुआ अब तक किसी को नहीं पता।
आने वाले दिनों में सावन माह शुरू हो जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है, वहीं 2028 में सिंहस्थ उज्जैन में होने वाला है, जिसे देकर भी प्रशासन की तैयारी चुनौती बन गई है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो आगे और भी हादसे होंगे और बेकसूर श्रद्धालु परिणाम भुगतेंगे।