खंडवा

श्रावण सोमवार… भगवान ओंकारेश्वर रजत पालकी में सवार होकर पहुंचे भगवान ममलेश्वर के द्वार

-श्रावण के चौथे सोमवार शाही पालकी में कराया भगवान को नगर भ्रमण -हेलीकॉप्टर से हुई पुष्प वर्षा, नौका विहार के बाद हुआ घाट पर अभिषेक -तीर्थनगरी में उमड़ी श्रद्धा, एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
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Aug 25, 2026
Omkareshwar Mahasawari
ओंकारेश्वर. महासवारी में शामिल श्रद्धालुओं की भीड़।

श्रावण क चौथे और अंतिम सोमवार को तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में भगवान भोलेनाथ की महासवारी धूमधाम और भव्यता के साथ निकली। फूलों से सजी चांदी की पालकी में विराजित होकर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराज भगवान ममलेश्वर के द्वार पहुंचे। श्रावण के चौथे सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर की पालकी विहार के साथ ममलेश्वर मंदिर पहुंचने की परंपरा का निर्वहन होता है।

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद निकले भ्रमण पर

ओंकारेश्वर मंदिर से गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बाबा ओंकारनाथ दोपहर 2 बजे मंदिर प्रांगण से भक्तों के बीच पहुंचे। सवारी के दर्शन के लिए दोनों तटों सहित मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर से प्रारंभ हुई सवारी कोटितीर्थ घाट पहुंची, जहां भगवान ओंकारेश्वर का पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर भक्तिमय वातावरण को और भव्य बना दिया गया। इसके बाद सवारी नर्मदा के उत्तर तट स्थित गोमुख घाट पहुंची, जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी का अभिषेक संपन्न हुआ।

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दर्शन के लिए लगी कतार

सवारी के दौरान गोमुख घाट, ममलेश्वर मंदिर, ब्रह्मपुरी, गजानंद आश्रम, डैम रोड, बालवाड़ी, पुराना बस स्टैंड, मुख्य मार्ग, जेपी चौक, पुराने झूला पुल, बड़ा चौक और शिवपुरी क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। दही झूला पुल और पुराने झूला पुल पर भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन और सवारी की एक झलक पाने के लिए मौजूद रहे। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी निर्धारित मार्ग से होते हुए देर रात करीब 11 बजे वापस ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंची। वहीं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी जेपी चौक से वापस गोमुख घाट होते हुए ममलेश्वर मंदिर पहुंची, जहां सवारी का भव्य स्वागत किया गया।

सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं को कराया फलाहार और जलपान

महासवारी में शामिल श्रद्धालुओं की सेवा के लिए मार्ग में जगह-जगह सेवा पंडाल लगाए गए। ब्रह्मपुरी क्षेत्र, पुराना बस स्टैंड और बालवाड़ी सहित विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों एवं बाहर से आए श्रद्धालुओं ने फलाहार, चाय, ठंडाई, शीतल जल और प्रसादी के भंडारे लगाए। सेवा शिविरों में भक्तों को पूरे उत्साह के साथ जलपान और प्रसादी वितरित की गई।

झांकियां और ढोल-ताशे रहे आकर्षण का केंद्र

महासवारी में बैंड, ताशे, ढोल, भजन मंडलियां, घोड़े और ऊंट आकर्षण का केंद्र रहे। इसके साथ ही 12 ज्योतिर्लिंग, नर्मदा नदी सहित विभिन्न धार्मिक एवं आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। सवारी के मार्ग में भक्त भजन-कीर्तन और भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए नजर आए। चौथे और अंतिम श्रावण सोमवार की महासवारी के साथ देर रात तक पूरी तीर्थनगरी शिव भक्ति में लीन नजर आई। करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने ज्योतिर्लिंग दर्शन किए।

Updated on:
25 Aug 2026 12:13 pm
Published on:
25 Aug 2026 12:13 pm