
ओंकारेश्वर. पालकी में सवार ज्योतिर्लिंग भगवान को कराया नौका विहार।
श्रावण के तीसरे सोमवार तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की भव्य सवारी निकाली गई। दोपहर 3 बजे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से सवारी का प्रस्थान हुआ। सवारी कोटि तीर्थ घाट पहुंची, जहां पंडित राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में 251 लीटर दूध से भगवान ओंकारेश्वर महादेव का महा रुद्राभिषेक किया गया।
महा रुद्राभिषेक के पश्चात भगवान ओंकारेश्वर का नौका विहार कराया गया। इसके बाद सवारी गोमुख घाट, बालवाड़ी, पुराना बस स्टैंड, विष्णुपुरी मेन रोड, जेपी चौक, पुराना झूलापुल और शिवपुरी होते हुए रात्रि करीब 9.30 बजे वापस मंदिर पहुंची। तीसरे श्रावण सोमवार पर ममलेश्वर महादेव की सवारी भी विशेष रूप से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में पहुंची। ममलेश्वर मंदिर में स्थानीय भक्तों द्वारा बाबा को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद नौका विहार करते हुए ममलेश्वर महादेव की सवारी ओंकार मठ घाट से ओंकारेश्वर क्षेत्र में पहुंची।
सवारी बड़ चौक और मुख्य बाजार होते हुए कोटि तीर्थ घाट पहुंची, जहां से नगर भ्रमण आगे शुरू हुआ। परंपरागत रूप से ममलेश्वर महादेव की सवारी ओंकारेश्वर क्षेत्र में नहीं जाती है, लेकिन तीसरे श्रावण सोमवार को इस विशेष परंपरा का निर्वहन किया जाता है। नौका विहार के बाद दोनों सवारियां नर्मदा के उत्तर तट पर स्थित गोमुख घाट से नगर भ्रमण के लिए साथ-साथ आगे बढ़ीं। दोनों सवारियां जेपी चौक तक साथ रहीं। इसके बाद ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी ओंकारेश्वर मंदिर तथा ममलेश्वर महादेव की सवारी ममलेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो गई।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में चांदी गेट के सामने नाग देवता का प्राचीन स्थान है। करीब 3 फीट लंबे और 3 इंच गहरे इस स्थान को नाग देवता का स्थान माना जाता है। इसे लकड़ी के पटिए से ढंककर रखा जाता है। परंपरा के अनुसार यहां वर्ष में एक बार नाग पंचमी के अवसर पर राजपरिवार की ओर से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष भी नाग पंचमी के अवसर पर राजपुरोहित रामचंद्र परसाई ने श्रीजी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी एवं ओंकारेश्वर के परंपरागत राजा राव पुष्पेंद्र सिंह की उपस्थिति में नाग देवता का पूजन विधि-विधान से संपन्न कराया।
Updated on:
18 Aug 2026 12:06 pm
Published on:
18 Aug 2026 12:05 pm
