
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में वीआइपी दर्शन के नाम पर दर्शनार्थियों से ठगी का खेल जोरों पर है। वीआइपी दर्शन के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के साथ मंदिर प्रबंधन के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की भी इसमें आशंका नजर आ रही है। रविवार को गुजरात के श्रद्धालुओं से हुई ठगी में ऑनलाइन पैमेंट होने के बाद भी प्रशासन दूसरे दिन तक यूपीआइ ट्रांजेक्शन का पता नहीं लगा पाया था।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धालुओं से ठगी के मामले में पूरा मंदिर प्रबंधन और प्रशासन के अधिकारी संदेह के घेरे में नजर आ रहे है। रविवार को यहां सूरत से आए 37 श्रद्धालुओं द्वारा वीआइपी प्रोटोकॉल नि:शुल्क दर्शन की बुकिंग के बावजूद एक पंडित द्वारा यात्रियों से 700 रुपए प्रति व्यक्ति के नाम से 25900 रुपए की ठगी की गई। सवाल यह उठ रहा है कि उक्त ठग को ये कैसे पता चला कि सूरत से आए यात्रियों की वीआइपी बुकिंग है और वह कौन से होटल में ठहरे हुए है।
ठग ने होटल में जाकर यात्रियों से संपर्क किया और वीआइपी प्रोटोकॉल की जानकारी देते हुए ऑनलाइन बुकिंग कराने के नाम पर ठगी की। उक्त पंडित ने अपने खाते में रुपए डलवाए थे। यहां वीआइपी सशुल्क दर्शन के लिए 300 रुपए प्रति व्यक्ति लगते है। प्रशासन अब तक यूपीआइ पैमेंट, होटल के सीसीटीवी कैमरे की जांच तक नहीं करवा पाया है। उल्लेखनीय है कि दर्शन प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव है, जो लंबे समय से यहां पदस्थ है। उनके कार्यकाल में अब तक कई घटनाएं सामने आ चुकी है।
-17 मई को ओडिशा से आए 17 श्रद्धालुओं से 6800 रुपए ऑनलाइन लेकर पंडित गायब हो गया, इस मामले में अब तक पंडित का पता नहीं चल पाया।
-10 मई को रिस्ट बैंड की कालाबाजारी का मामला और वीआइपी बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं की आइडी दूसरे को बेचने का मामला सामने आया था। चार लोगों पर कार्रवाई हुई।
-6 जुलाई को राजस्थान के 11 श्रद्धालुओं से वीआइपी दर्शन के नाम पर आरक्षक, मंदिर सुरक्षा गार्ड और फोटोग्राफर द्वारा 13200 रुपए ठगे गए। दो जेल गए, दो आरक्षक लाइन अटैच हुए।
किस यूपीआइ से ट्रांजेक्शन हुआ, उसकी जानकारी बैंक से निकलवा रहे है। जैसे ही उसकी जानकारी आएगी, संबंधित पर एफआइआर सहित सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील है कि अधिकृत वेवसाइट से स्वयं ही दर्शन बुकिंग करें।
ऋषव गुप्ता, कलेक्टर