
पंचायत एवं ग्रामीण विकास योजनाओं में गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिला पंचायत तक भ्रष्टाचार की 100 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। अब दो और ग्राम पंचायतों के मामले चर्चा में आए हैं। सुकवी रैयत में 30 लाख रुपए से अधिक के पुलिया निर्माण की गुणवत्ता पर सवालों के घेरे में आ गई है। पिपल्या में पत्नी को वेंडर बना बीस लाख रुपए से अधिक राशि निकाल लिया है।
सुकवी रैयत ग्राम पंचायतें में विकास कार्यों में दोयम दर्ज के कार्यों का ग्रामीणों के विरोध किया तो उन्हें सरपंच-सचिव धमका रहे हैं। मामले में जिपं सीईओं ने जांच बैठा दी है। वहीं पिपल्या पंचायत में सरपंच द्वारा पत्नी को वेंडर बनाकर लाखों रुपए का भुगतान कराने का मामला जांच में सामने आया है। दोनों मामलों में जिला पंचायत स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है।
जिले के सुकवी रैयत ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ ऐश्वर्य वर्मा से शिकायत की है। जिसमें ग्रामीणों ने कहा है कि सुकवी से मोहनियां मार्ग पर पांच पुलिया का निर्माण कराया गया है। प्रत्येक पुलिया की लागत करीब 6 लाख रुपए बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पांचों पुलिया का निर्माण महज तीन दिन में कर दिया गया। इससे तीस लाख से अधिक कीमत की पुलिया के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। पाइप के नीचे बेस तक नहीं बनाया गया। कई जगह पाइप का काम भी अधूरा छोड़ दिया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण में दोयम दर्जे की सामग्री का उपयोग हुआ है। ट्रैक्टर-ट्राली समेत बड़े वाहन निकलने पर पुलिया ढह जाएगी। ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर विरोध किया तो सरपंच और सचिव द्वारा उन्हें धमकाया जा रहा है। मामले में जिपं सीईओ ने गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित की है। टीम से रिपोर्ट तलब की गई है।
दूसरा मामला पिपल्या ग्राम पंचायत का है। जपं सदस्य की शिकायत पर जिला स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पंचायत पोर्टल के माध्यम से विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए सरपंच रूपनारायण गोखले की पत्नी ममताबाई रूपनारायण को वेंडर बनाकर भुगतान किया गया है।
पंचायत पोर्टल पर 1 नवंबर 2022 से 5 नवंबर 2025 तक कुल 20 लाख 49 हजार 462 रुपए 41 पैसे का आहरण किया गया। इसी तरह 12 लाख 46 हजार की पुलिया स्वीकृत में पुरानी पुलिया तोडऩे में 15 हजार 866 रुपए उपयोगिता दिखाई गई है। जांच कमेटी ने दोनों राशि को सरपंच-सचिव से वसूली योग्य बताया है। जांच में यह भी सामने आया कि सरपंच-सचिव की ओर से पंचायत पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल-बाउचर स्पष्ट नहीं हैं। कई दस्तावेज धुंधले होने से भुगतान और कार्यों की जांच पर भी सवाल उठे हैं।