
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है। पीआईसीयू के सख्त प्रोटाकॉल को अफसर और जनप्रतिनिधि भूल बैठे और भीड़ के रूप में अंदर तक प्रवेश कर गए। अफसर और नेताओं ने न तो हाथ धुले और न ही सैनिटाइज किए और न ही मास्क लगाया। हालांकि कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने यह कहकर बचाव किया कि सभी चप्पल व मास्क पहने हुए थे।
जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड में एक साथ अफसर और नेताओं की भीड़ देख डॉक्टर और स्टॉफ सकते में आ गए। बाद में कुछ ने बाहर रखी चप्पल पहनीं और मास्क लगाए। इस लापरवाही के चलते बच्चों में संक्रमण होने की आशंका जताई गई। हालांकि कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने यह कहकर बचाव किया कि सभी चप्पल व मास्क पहने हुए थे।
जिला अस्पताल के पीआईसीयू वार्ड में गंभीर हालत में भर्ती बच्चों को संक्रमण से बचाने का प्रोटोकॉल है। बावजूद निरीक्षण के दौरान वार्ड में बड़ी संख्या में अफसर-नेता एक साथ प्रवेश कर गए। प्रोटाकॉल के नाम पर कुछ अधिकारियों ने सिर्फ जूता बदलकर चप्पल पहनी। किसी ने न तो हाथ की धुलाई की ओर ही सैनिटाइज किया और न ही मास्क पहना। जबकि पीआईसीयू में सामान्य स्थिति में केवल चिकित्सक, नर्स और बच्चे के माता-पिता या कानूनी अभिभावक को ही प्रवेश की अनुमति रहती है। प्रवेश से पहले हाथों की सफाई जरूरी है। मास्क, कैप, शू-कवर और अन्य संक्रमण नियंत्रण होते हैं।
पीआईसीयू के भीतर फोटो और वीडियो भी बनाए गए। वार्ड में मोबाइल और फोटो-वीडियो पर रोक रहती है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच भर्ती बच्चों की सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। इस दौरान गेट के बाहर भी निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत समेत एसडीएम, तहसीलदार समेत कई डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य टीम की भीड़ रही।
निरीक्षण दल करीब 10 मिनट से अधिक समय तक पीआईसीयू में रहा। विधायक कंचन तनवे, धर्मेंद्र बजाज, हरीश कोटवाल, जिपं सीईओ ऐश्वर्य वर्मा, अपर कलेक्टर श्रद्धा शुक्ला, डीन डॉ. संजय दादू, सीएमएचओ डॉ. ओपी जुगतावत और सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
ड्यूटी डॉक्टर और नर्स वार्ड के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार काम करते नजर आए। लेकिन निरीक्षण दल की बड़ी संख्या में मौजूदगी को लेकर सवाल बने रहे। विशेषज्ञों के अनुसार पीआईसीयू जैसे संवेदनशील वार्डों में अनावश्यक आवाजाही संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से जोखिम बढ़ा सकती है।
पीआईसीयू के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचे। यहां भर्ती बच्चों की स्थिति देखी गई। परिजनों से जानकारी ली गई।10 माह के प्रिंस का वजन कराया। 18 अगस्त को भर्ती के समय वजन 5.800 किलोग्राम था। 10 दिन बाद वजन बढ़कर 6.510 किलोग्राम दर्ज हुआ। कलेक्टर ने कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर भर्ती कराने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान डीन डॉ. संजय दादू से कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट के मरीजों को बाहर नहीं भेजा जाए। डॉक्टरों को एम्स में प्रशिक्षण दिलाकर अस्पताल में ही ऑपरेशन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने तीन दिन के भीतर प्राइवेट वार्ड और पुराने आईसीयू को शुरू करने के निर्देश दिए। पीआईसीयू के विस्तार के लिए सीईओ को नई जगह तलाशने को भी कहा। बेड और वार्मर की संख्या बढ़ाने के साथ मरीजों के परिजनों के लिए कुर्सियां लगाने के निर्देश दिए गए।
शिविर में अफसर और नेताओं ने भी जांच कराई। महापौर अमृता यादव का ब्लड प्रेशर 157/94 दर्ज हुआ। विधायक का 155/94 और कलेक्टर ऋषव गुप्ता का 144/95 दर्ज किया गया। एसपी अगम जैन का रक्तचाप 122/94 रिकॉर्ड हुआ। शिविर में 350 मरीजों का उपचार किया गया।
स्वच्छता सत्र में सूखे और गीले कचरे को लेकर सवाल पूछे गए। सही जवाब देने वालों को पुरस्कृत किया गया। इससे पहले उद्यम संवाद में विधायक समेत अन्य ने उद्यमियों से सवाल जवाब किए। इसके बाद अधिकारी और नेता इंडस्ट्रियल एरिया में एक संस्था का निरीक्षण भी किया।
पीआईसीयू में प्रवेश के दौरान प्रोटोकॉल का पालन किया गया। जूते बाहर उतारने के बाद सभी चप्पल पहनकर प्रवेश किया। सीनियर डॉक्टर भी मौजूद थे। संक्रमण फैलने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
केवल डॉक्टर, नर्स और माता-पिता या कानूनी अभिभावक को प्रवेश।
रिश्तेदारों और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक।
एक समय में सीमित अटेंडेंट ही बच्चे के पास जा सकते हैं।
प्रवेश से पहले हाथ धोना या सैनिटाइजर जरूरी।
शू-कवर, कैप, मास्क और अस्पताल का गाउन पहनना जरूरी।
सर्दी, खांसी और बुखार वाले व्यक्ति को प्रवेश नहीं।
बाहरी बैग, खाना और अनावश्यक सामान प्रतिबंधित।
मोबाइल के अनावश्यक उपयोग पर रोक।
फोटो और वीडियो बनाना प्रतिबंधित।