
दीपावली के उल्लास के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। लॉटरी के सहारे अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचीं पिंकी वानखेड़े के सामने अब अपना बहुमत साबित करने की चुनौती है। सदस्यों की नाराजगी अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंच गई है। संभागायुक्त ने 14 नवंबर को सम्मिलन की तारीख तय कर दी है। अब अध्यक्ष और विरोधी खेमे के बीच सदस्यों को साधने की कवायद तेज हो गई है।
इंदौर संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए 14 नवंबर को सुबह 11 बजे का समय निर्धारित किया है। सम्मिलन जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में होगा। इसकी अध्यक्षता के लिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। तारीख घोषित होते ही जिला पंचायत के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। दोनों खेमे अपने समर्थन में सदस्यों की संख्या जुटाने में लगे हैं। अब निगाहें 14 नवंबर के शक्ति परीक्षण पर टिकी हैं।
जिला पंचायत का कार्यकाल चार साल से अधिक समय पूरा कर चुका है। शुरुआत में करीब डेढ़ साल तक कंचन तनवे अध्यक्ष रहीं। विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। इसके बाद फरवरी 2024 में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ।
अजा आरक्षित वार्ड-2 से निर्वाचित हुईं पिंकी वानखेड़े को भाजपा ने अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस समर्थित नानकराम बड़वाहे भी मैदान में थे। दोनों को आठ-आठ वोट मिले। मुकाबला बराबरी पर अटकने के बाद लॉटरी निकाली गई। इसमें पिंकी वानखेड़े के नाम की पर्ची निकली और वे अध्यक्ष चुन ली गईं। अब उसी कुर्सी पर बने रहने के लिए उन्हें सदस्यों का विश्वास हासिल करना होगा।
वर्ष 2022 : जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कंचन तनवे और कांग्रेस समर्थित नानकराम बड़वाहे आमने-सामने थे। कंचन को आठ और नानकराम को सात वोट मिले। एक वोट त्रुटिपूर्ण होने से निरस्त हुआ था।
फरवरी 2024 : कंचन तनवे के विधायक बनने के बाद अध्यक्ष पद रिक्त हुआ। पिंकी वानखेड़े और नानकराम बड़वाहे के बीच मुकाबला हुआ। दोनों को आठ-आठ वोट मिले। लॉटरी में पिंकी वानखेडे के नाम की पर्ची निकली और वे अध्यक्ष चुनी गईं।
इस बार 15 सदस्यों के बीच जुटाना होगा बहुमत
जिपं के 16 सदस्यों से से एक सदस्य का निर्धन हो गया है। इस बार चुनाव 15 सदस्यों के बीच होगा। बहुमत के लिए आठ वोट जुटाने होंगे।
अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं
जिपं सदस्य मनोज भरतकर का कहना अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है। सदस्य और कर्मचारी दोनों असंतुष्ट हैं। क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर भी सदस्य लगातार उपेक्षा महसूस कर रहे हैं। बजट आवंटन में भी असमानता बरती गई। बैठकों में सदस्यों की सहमति को महत्व नहीं दिया गया।
बजट आवंटन में भेदभाव
जिपं सदस्य नानकराम बड़वाहे का कहना है कि बजट आवंटन में भेदभाव किया जा रहा है। विकास राशि के वितरण में समानता नहीं रखी गई। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के क्षेत्रों में करीब डेढ़ करोड़ रुपए आवंटित किए गए। सदस्यों के क्षेत्रों के लिए 25 से 30 लाख रुपए के प्रस्ताव बनाए जाते हैं। बैठकों में भी सदस्यों की सहमति से निर्णय नहीं लिए जाते हैं।
मुझे अपने कार्य और भगवान पर भरोसा
जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े का कहना है कि ढाई साल के कार्यकाल में नियमित बैठकें हुईं। सदस्यों के प्रस्तावों पर चर्चा कर काम कराए जा रहे हैं। बजट भी जारी किए जा रहे हैं। कुछ सदस्य ढाई साल से परेशान कर रहे हैं। जनता के लिए काम कर रही हूं। मुझे काम पर पूरा विश्वास है। इसलिए भगवान पर भरोसा है।